कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि पशु चिकित्सकों की भूमिका अन्य चिकित्सकों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वे उन पशुओं का उपचार करते हैं जो अपनी पीड़ा स्वयं व्यक्त नहीं कर सकते। ऐसे में उनकी संवेदनशीलता, अनुभव और दक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। वे कुफरी में हिमाचल प्रदेश वेटरनरी ऑफिसर्स एसोसिएशन के जनरल हाउस एवं सेमिनार को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि और पशुपालन को एकीकृत कर किसानों एवं पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही है। भारत दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है और महिला स्वयं सहायता समूह इस क्षेत्र में अहम योगदान दे रहे हैं। कांगड़ा के ढगवार में बन रहा दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र अक्टूबर तक शुरू होगा, जिससे रोजगार और दुग्ध क्षेत्र दोनों को गति मिलेगी।
प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि पशु चिकित्सकों को भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए वैज्ञानिक रोडमैप तैयार करना चाहिए, जिसमें मौसम आधारित बीमारियों की रोकथाम और समय पर दवाइयों व टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो। उन्होंने निराश्रित पशुओं की समस्या पर शोध और व्यवहारिक समाधान की आवश्यकता पर भी बल दिया।
उन्होंने बताया कि सरकार युवाओं को पशुपालन से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्राकृतिक खेती उत्पादों पर एमएसपी, तथा पोल्ट्री और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की योजनाएं भी चल रही हैं। जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए ‘पहल’ योजना केंद्र को भेजी गई है।
कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. संजीव कुमार धीमान ने कहा कि विभाग ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और 43 लाख पशुधन की देखभाल के साथ पशुपालकों की समस्याओं का समाधान भी कर रहा है। ढगवार दुग्ध संयंत्र से दुग्ध संग्रहण क्षमता बढ़ेगी और पशुपालकों को सीधा लाभ मिलेगा।
वहीं वेटरनरी ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. नीरज मोहन ने कहा कि पशु चिकित्सा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला है और हिमाचल में दूध पर एमएसपी लागू कर सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है।



