हिमाचल की विरासत: प्राचीन बैल-घोड़ा सिक्के

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डॉ. कमल के. प्यासा  – मण्डी

बैल व घोड़े वाले सिक्के, जो कि हिन्दू शाही सिक्कों के नाम से प्रसिद्ध हैं, काबुल व कांधार के शाही हिन्दू शासकों द्वारा 8वीं–9वीं शताब्दी में चलाए गए थे। इन सिक्कों का काल 8वीं से 12वीं शताब्दी तक रहा है। इनको चलाने वाले शासकों में दिल्ली के तोमर, अजमेर के चाहमान (पृथ्वीराज चौहान) तथा नरवाड़ के राजवंश आदि भी शामिल हैं।

इन सिक्कों में दोनों ओर अलग-अलग प्रतीक देखने को मिलते हैं। सिक्के के एक ओर बैल का चित्रण मिलता है, जिसके कूबड़ पर त्रिशूल अंकित है। बैल के ऊपर की ओर देवनागरी या शारदा लिपि में “श्री सपलपति देव” या “श्री सामन्त देव” लिखा मिलता है। सिक्के की दूसरी ओर किसी योद्धा को घोड़े पर भाला पकड़े हुए दर्शाया गया है।

चांदी, तांबे व मिश्र धातु से बने इन सिक्कों को, राजपूत (मध्यकाल) काल से संबंधित होने के कारण, “जीतल” नाम से भी जाना जाता है। घोड़ा व बैल वाले इन सिक्कों में समय के साथ चांदी की मात्रा कम होती चली गई, जिससे उस समय की बदलती आर्थिक स्थिति का आभास होता है।

तोमर, चौहान, सपलपति देव व सामन्त देव शासकों के अतिरिक्त सल्लक्षपाल, अनंगपाल, मदनपाल देव, शाकाम्बरी के चाहमान, सोमेश्वर देव आदि ने भी अपने घोड़े व बैल वाले सिक्के चलाए थे। इन्हीं का अनुसरण करते हुए बाद में प्रतिहारों, वर्मनों, चहादेव, असल्ल देव, नरवर के शासकों तथा जाजपेला वंश के गणपति द्वारा भी ऐसे ही सिक्के चलाए गए।

मण्डी से प्राप्त बैल व घोड़े वाले कुछ सिक्कों का विवरण इस प्रकार है :

1.

सिक्के की धातु = चांदी-तांबा मिश्र धातु।
सिक्के का आकार = गोलाकार।
सिक्के का व्यास = 1.5 सै. मी.
सिक्के की मोटाई = 3.00 मी. मी.
सिक्के का भार = 3.800 ग्राम।
सिक्के का काल = 8वीं से 12वीं शताब्दी।
सिक्के की लिपि = देवनागरी/शारदा।
सिक्का संग्रहकर्ता = कमल के. प्यासा, परुथी संग्रहालय, मण्डी।
सिक्के का प्राप्ति स्थान = मण्डी, बाजार से खरीद।

सिक्के का विवरण : बैल-घोड़े वाले इस सिक्के के एक ओर बैल की आकृति में बैल का मुंह दिखाई नहीं देता, क्योंकि मुंह वाला भाग कटा हुआ है। बैल के पीछे की ओर त्रिशूल बना दिखाई देता है। सिक्के की दूसरी ओर लेख स्पष्ट नहीं है, केवल गोलाकार सीमा-रेखा का कुछ भाग दिखाई देता है।

2.

सिक्के की धातु = चांदी-तांबा मिश्र धातु।
सिक्के का आकार = गोलाकार।
सिक्के का व्यास = 1.4 सै. मी.
सिक्के की मोटाई = 2.00 मी. मी.
सिक्के का भार = 3.800 ग्राम।
सिक्के का काल = 8वीं से 12वीं शताब्दी।
सिक्के की लिपि = देवनागरी/शारदा।
सिक्का संग्रहकर्ता = कमल के. प्यासा, परुथी संग्रहालय, मण्डी।
सिक्का प्राप्ति स्थान = मण्डी, बाजार से खरीद।

सिक्के का विवरण : इस सिक्के के एक ओर भी बैल का सिर आधा ही दिखाई देता है। बैल के पीछे की ओर त्रिशूल तथा सर्प की आकृति भी देखने को मिलती है। सिक्के की दूसरी ओर अपूर्ण घुड़सवार तथा अस्पष्ट लेख के कुछ अक्षर दिखाई देते हैं।

3.

सिक्के की धातु = चांदी-तांबा मिश्र धातु।
सिक्के का आकार = गोलाकार।
सिक्के का व्यास = 1.4 सै. मी.
सिक्के की मोटाई = 2.00 मी. मी.
सिक्के का भार = 2.900 ग्राम।
सिक्के का काल = 8वीं से 12वीं शताब्दी।
सिक्के की लिपि = देवनागरी/शारदा।
सिक्का संग्रहकर्ता = कमल के. प्यासा, परुथी संग्रहालय, मण्डी।
सिक्का प्राप्ति स्थान = मण्डी, बाजार से खरीद।

सिक्के का विवरण : इस सिक्के में भी पूर्व वर्णित बैल-घोड़े वाले सिक्कों की तरह बैल का सिर दिखाई नहीं देता और सिक्के की दूसरी ओर गोल सीमा-रेखा स्पष्ट देखी जा सकती है। शेष भाग अस्पष्ट है।

4.

सिक्के की धातु = चांदी-तांबा मिश्र धातु।
सिक्के का आकार = गोलाकार।
सिक्के का व्यास = 1.60 सै. मी.
सिक्के की मोटाई = 1.80 मी. मी.
सिक्के का भार = 3.400 ग्राम।
सिक्के का काल = 8वीं से 12वीं शताब्दी।
सिक्के की लिपि = देवनागरी/शारदा।
सिक्का संग्रहकर्ता = कमल के. प्यासा, परुथी संग्रहालय, मण्डी।
सिक्का प्राप्ति स्थान = मण्डी, बाजार से खरीद।

सिक्के का विवरण : इस सिक्के के एक ओर बैल का केवल आधा भाग दिखाई देता है। दूसरी ओर घुड़सवार के ऊपर की ओर कुछ अस्पष्ट अक्षर भी दिखाई देते हैं।

5.

सिक्के की धातु = चांदी-तांबा मिश्र धातु।
सिक्के का आकार = गोलाकार।
सिक्के का व्यास = 1.60 सै. मी.
सिक्के की मोटाई = 1.80 मी. मी.
सिक्के का भार = 3.20 ग्राम।
सिक्के का काल = 8वीं से 12वीं शताब्दी।
सिक्के की लिपि = देवनागरी/शारदा।
सिक्का संग्रहकर्ता = कमल के. प्यासा, परुथी संग्रहालय, मण्डी।
सिक्का प्राप्ति स्थान = मण्डी, बाजार से खरीद।

सिक्के का विवरण : इस सिक्के में एक ओर बैल का कुछ ही भाग दिखाई देता है। दूसरी ओर कुछ भी स्पष्ट नहीं है।

6.

सिक्के की धातु = चांदी-तांबा मिश्र धातु।
सिक्के का आकार = गोलाकार।
सिक्के का व्यास = 1.3 सै. मी.
सिक्के की मोटाई = 2.00 मी. मी.
सिक्के का भार = 2.99 ग्राम।
सिक्के का काल = 8वीं से 12वीं शताब्दी।
सिक्के की लिपि = देवनागरी/शारदा।
सिक्का संग्रहकर्ता = कमल के. प्यासा, परुथी संग्रहालय, मण्डी।
सिक्का प्राप्ति स्थान = मण्डी, बाजार से खरीद।

सिक्के का विवरण : इस सिक्के के एक ओर आधार रेखा पर एक मुंह खुले जीव (हाथी) जैसी आकृति दिखाई देती है। सिक्के की दूसरी ओर देवनागरी व शारदा लिपि के स्पष्ट एवं सुन्दर अक्षर देखने को मिलते हैं।

7.

सिक्के की धातु = चांदी-तांबा मिश्र धातु।
सिक्के का आकार = गोलाकार।
सिक्के का व्यास = 1.5 सै. मी.
सिक्के की मोटाई = 1.85 मी. मी.
सिक्के का भार = 3.500 ग्राम।
सिक्के का काल = 8वीं से 12वीं शताब्दी।
सिक्के की लिपि = देवनागरी/शारदा।
सिक्का संग्रहकर्ता = कमल के. प्यासा, मण्डी।
सिक्का प्राप्ति स्थान = मण्डी, बाजार से खरीद।

सिक्के का विवरण : इस सिक्के के एक ओर अस्पष्ट बैल की आकृति देखी जा सकती है। साथ ही सिक्के की गोलाकार सीमा-रेखा का कुछ भाग भी दिखाई देता है। दूसरी ओर घुड़सवार तथा कुछ अक्षर दिखाई देते हैं।

8.

सिक्के की धातु = चांदी-तांबा मिश्र धातु।
सिक्के का आकार = गोलाकार।
सिक्के का व्यास = 1.5 सै. मी.
सिक्के की मोटाई = 2.00 मी. मी.
सिक्के का भार = 3.00 ग्राम।
सिक्के का काल = 8वीं से 12वीं शताब्दी।
सिक्के की लिपि = देवनागरी/शारदा।
सिक्का संग्रहकर्ता = कमल के. प्यासा, परुथी संग्रहालय, मण्डी।
सिक्का प्राप्ति स्थान = मण्डी, बाजार से खरीद।

सिक्के का विवरण : इस सिक्के के एक ओर भी अस्पष्ट बैल की आकृति दिखाई देती है, जिसके ऊपर की ओर कुछ अस्पष्ट अक्षर भी लिखे दिखाई देते हैं। सिक्के की दूसरी ओर अस्पष्ट घुड़सवार की आकृति दिखाई देती है।

बैल व घोड़े वाले सिक्के संग्रह में और भी हैं, लेकिन उनके लेख एवं आकृतियाँ अत्यधिक अस्पष्ट होने के कारण उन्हें यहाँ शामिल नहीं किया गया है।

हिमाचल से प्राप्त गाधिया सिक्के व ऐतिहासिक परिचय

 

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