नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के कर्मचारी हितैषी होने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में कर्मचारियों के हित में काम कर रही है तो प्रदेशभर में कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर क्यों हैं।
जयराम ठाकुर ने जारी बयान में कहा कि पेंशनर्स, सेवानिवृत्त कर्मचारी और अन्य वर्ग अपने लंबित भुगतान व मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा कर्मचारियों के धरना स्थल पर जाकर भी केवल अधूरी बातें की गईं और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को सरकार की घोषणाओं और आश्वासनों पर भरोसा नहीं रह गया है।
उन्होंने कहा कि केवल वादों और घोषणाओं से सरकार नहीं चलती, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करना जरूरी होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पद की गरिमा बनाए रखने और कर्मचारियों की वास्तविक समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।
पेपर लीक मामले पर जयराम ठाकुर ने कहा कि परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार सख्त कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक के माध्यम से पेपर लीक जैसे मामलों में कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है, जिससे दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी।
उन्होंने कांग्रेस सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पेपर लीक के मामलों ने युवाओं को प्रभावित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में भी पेपर लीक मामलों में आरोपों के बावजूद दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि एक ओर केंद्र सरकार परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए कानून मजबूत कर रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सरकारों का रिकॉर्ड युवाओं के हितों की रक्षा करने में कमजोर रहा है।



