शिमला में आयोजित हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग की समीक्षा बैठक में कई विभाग अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के तहत संचालित योजनाओं का वास्तविक लाभ बताने में असफल रहे। खासकर लोक निर्माण विभाग के अधिकारी यह नहीं बता सके कि योजनाओं से अनुसूचित जाति समुदाय को कितना फायदा मिला। इस पर आयोग ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि बैठक से पहले रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए थे, इसके बावजूद अधिकारी आवश्यक रिकॉर्ड लेकर नहीं पहुंचे।
आयोग अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने कहा कि कई विभागों का रिकॉर्ड संतोषजनक नहीं है और यह अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
बैठक में अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025-26 में जारी 25.43 करोड़ रुपये में से 23.49 करोड़ रुपये, यानी 92 प्रतिशत राशि खर्च होने की जानकारी दी गई। आयोग ने लोक निर्माण विभाग को ऐसी प्रमुख योजनाओं का ब्यौरा देने के निर्देश दिए, जिनसे सबसे अधिक अनुसूचित जाति परिवारों को लाभ मिला हो।
आयोग ने अंबेडकर भवनों के रखरखाव, एससी/एसटी अत्याचार अधिनियम के मामलों की जांच, विजिलेंस कमेटियों की नियमित बैठकें और सभी विभागों को सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश भी दिए।
बैठक में कई विभागाध्यक्षों के अनुपस्थित रहने पर भी आयोग ने सख्ती दिखाई। लोक निर्माण विभाग की ओर से अधीनस्थ अधिकारियों के पहुंचने पर आयोग ने तत्काल अधिशासी अभियंता को तलब किया और जिलाधीश को अनुपस्थित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेकर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए।



