हिमाचल प्रदेश के निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक विशेष संवाद सत्र का आयोजन किया गया। हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग (HPPERC) के सदस्य ललित कुमार और विजय पाल सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में राज्य के निजी उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार करने पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
सत्र के दौरान पाठ्यक्रमों की समयबद्ध मंजूरी, फर्जी डिग्रियों के मामलों पर प्रभावी अंकुश लगाने और निजी विश्वविद्यालयों द्वारा अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर पारदर्शी जानकारी साझा करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों के दैनंदिन संचालन में प्रमोटरों की भूमिका और उनकी सीमाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
परीक्षा और प्रशासनिक प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए विनियामक आयोग ने आंतरिक मूल्यांकन में पारदर्शिता, अनुचित साधनों के प्रयोग पर रोक तथा मूल्यांकन प्रक्रियाओं के मानकीकरण पर विशेष बल दिया। आयोग ने संस्थानों को निर्देश दिया कि वे विद्यार्थियों की शिकायतों के समयबद्ध और प्रभावी निवारण के लिए एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करें।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में साझा दृष्टिकोण विकसित करने के लिए बैठक में जल्द ही ‘सरकार-विश्वविद्यालय साझेदारी’ पर एक राज्यस्तरीय कॉन्क्लेव आयोजित करने का निर्णय लिया गया। संवाद सत्र के अंत में निजी विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने अपनी व्यावहारिक चुनौतियां आयोग के समक्ष रखीं और राज्य के युवाओं के लिए रोजगार क्षमता, कौशल विकास और कैंपस प्लेसमेंट बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
Kangra Set to Host Grand State-Level Sanskrit Day Celebrations



