मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार लाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश में विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है और इसी दिशा में डायग्नोस्टिक सेवाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने जॉब ट्रेनी और सुपर-स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों के इच्छुक डॉक्टरों को स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई करने की अनुमति देने का फैसला सुनाया। इसके साथ ही, डॉक्टरों के बॉन्ड की राशि और समय-अवधि में बढ़ोतरी की जाएगी ताकि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत वे वापस लौटकर प्रदेश की जनता की सेवा कर सकें।
निदान सुविधाओं को पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के रेडियोलॉजी विभागों में होने वाली एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जांचों के डेटा को 20 अक्तूबर तक शत-प्रतिशत डिजिटल करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्य को समय पर पूरा करने के लिए सरकार पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराएगी, साथ ही नर्सों और तकनीशियनों की नई भर्तियों में तेजी लाने के लिए खाली पदों की जानकारी मांगी गई है।
गंभीर और जटिल बीमारियों के अत्याधुनिक इलाज के लिए एआईएमएसएस चमियाणा सहित अन्य प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित करने की योजना बनाई गई है, जिसके लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित कर दी गई है। इसके अलावा, मेडिकल विद्यार्थियों और चिकित्सकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से रूबरू कराने के उद्देश्य से उन्हें विदेश में एक्सपोजर विजिट पर भी भेजा जाएगा, जिससे प्राप्त अनुभव का लाभ सीधे हिमाचल के मरीजों को मिलेगा।
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