मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के निर्देशों के अनुरूप हिमाचल प्रदेश पुलिस ने नशा तस्करों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और अधिक धार देते हुए नूरपुर क्षेत्र में 74.12 लाख रुपये की अवैध संपत्ति को फ्रीज कर दिया है, जिसकी पुष्टि अब नई दिल्ली स्थित सक्षम प्राधिकारी द्वारा भी कर दी गई है। पुलिस थाना ज्वाली के अंतर्गत एक मामले की गहन वित्तीय जांच के दौरान यह खुलासा हुआ था कि आरोपी ने अवैध नशे के कारोबार से अर्जित धन का उपयोग करके परिसंपत्तियां बनाई हैं। इसके बाद 18 सितंबर 2026 को एनडीपीएस एक्ट की धारा 68एफ(1) के तहत संपत्ति फ्रीज करने के आदेश जारी किए गए थे, जिन पर 15 अक्तूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित सक्षम प्राधिकारी एवं प्रशासक द्वारा विधिवत मुहर लगा दी गई है।
इस कार्रवाई के तहत जिला कांगड़ा के ज्वाली तहसील के अंतर्गत आने वाले मकड़ाहन क्षेत्र में स्थित दो मंजिला आवासीय सह-व्यावसायिक परिसर को फ्रीज किया गया है, जिसमें सात दुकानें शामिल हैं और इसका मूल्य लगभग 68.99 लाख रुपये है। इसके अलावा, वर्ष 2019 में खरीदे गए करीब 5.13 लाख रुपये मूल्य के एक ट्रैक्टर को भी इस दायरे में लाया गया है, क्योंकि इस वाहन की खरीद के लिए उपयोग किए गए धन के स्रोतों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त वित्तीय दस्तावेज या आयकर रिटर्न सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इन दोनों संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 74.13 लाख रुपये है।
प्रदेश पुलिस नशा तस्करी के खिलाफ केवल मादक पदार्थों की बरामदगी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अपराधियों के वित्तीय नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए उनकी अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों पर भी लगातार चौतरफा प्रहार कर रही है। इस व्यापक अभियान के तहत अब तक सक्षम प्राधिकारी की पुष्टि के बाद पूरे प्रदेश में लगभग 30.70 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों को जब्त किया जा चुका है। पुलिस प्रशासन ने आम जनता से भी यह अपील की है कि नशा तस्करी या संदिग्ध संपत्तियों से जुड़ी कोई भी जानकारी तुरंत पुलिस के साथ साझा करें, ताकि इस सामाजिक अभिशाप को जड़ से समाप्त किया जा सके।
साक्षरता और गुणवत्ता में देश के शीर्ष राज्यों में चमका हिमाचल प्रदेश


