बहुत दिनों से एक समर्पित पत्रकार के पास दबी जुबान में शिकायतें आ रही थीं कि गाँव की नदी में जो अवैध खनन हो रहा है, वह रात के अंधेरे में एक विशेष जेसीबी के द्वारा होता है| पत्रकार सच जानने के लिए उस रात गाँव में ही रुक गया| जैसे ही अंधेरे ने अपने पाँव पसारे, दनदनाती हुई एक जेसीबी, कुछ ट्रैक्टर, तथा पंद्रह-बीस प्रवासी मजदूर भी पहुँच गए और नदी का सीना चीरकर ट्रैक्टरों पर रेत, बजरी और पत्थर भरे जाने लगे| पत्रकार ने छिपकर इस कृत्य की बहुत सारी तस्वीरें निकाल ली, जिनमें जेसीबी तथा ट्रैक्टरों का नंबर भी साफ-साफ पढ़ा जा सकता था|
वह सारी रात सोया नहीं और बड़ी मेहनत करके उसने खनन माफ़िया का पर्दाफ़ाश करने वाली न्यूज़ तैयार कर ली तथा मुख्य संपादक को यह कहकर सौंप दी कि यह खबर हमारी अखबार की मुखपृष्ठ की हेडलाइन बननी चाहिए|मगर अगले रोज़ जब अखबार निकली तो उसे घोर निराशा का सामना करना पड़ा, क्योंकि पूरी अखबार में उस विशेष खबर का ज़िक्र तक नहीं था
उसने सोचा वह खबर देने में लेट हो गया था, शायद इसी वजह से खबर नहीं छपी मगर दूसरे दिन भी इस खबर का कहीं कोई अता-पता नहीं था| वह बेचैन हो गया और तुरंत मुख्य संपादक से मिला और बिना किसी भूमिका के बोला, “मैंने अपनी जान जोखिम में डालकर एक विशेष ख़बर तैयार की ताकि खनन माफ़िया का सच सामने आ सके, मगर आपने ये खबर लगाई ही नहीं, ऐसा क्यों?” मुख्य सम्पादक हँसते हुए बोला, “देखो भाई तुम्हारी खबर वैसे तो मुखपृष्ठ पर लगने के काबिल है, मगर यह जिन लोगों के खिलाफ जा रही है, वे न केवल रसूखदार लोग हैं, अपितु हमारी अखबार के प्रयोजक भी हैं| मैं यह खबर लगवाना तो चाहता हूँ, मगर लाला (अखबार का मालिक) नहीं मानता| उसका कहना है कि हम किसी भी सूरत में अपने प्रयोजकों को नाराज़ नहीं कर सकते|



