Tag: रणजोध सिंह

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पढ़े लिखे लोग – लघु कथा

रणजोध सिंह - नालागढ़ जब से बनवारी लाल जी पंचायत प्रधान पद के लिए खड़े हुए थे, उनका दिन का चैन और रातों की नींद...

सूरज तो आज भी चमकता है : कविता

रणजोध सिंह - नालागढ़ हमने तमाम रौशनी को ढक दिया कंक्रीट के जंगल से वगरना दोस्त, सूरज तो सूरज है आज भी चमकता है| ये जो हर...

पिता- एक कल्पतरु – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह - नालागढ़ बच्चों की मुस्कान की खातिर अपनी मुस्कान भुलाता है बच्चें रखता राजा जैसे खुद भिखारी लगता है वह और नहीं कोई यारों यकीनन, बच्चों का पिता होता...

कैरियर इंग्लिश मीडियम बच्चों का – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह - नालागढ़ जैसे ही ग्राम वासियों को पता चला की अगामी चुनावों के मध्य नजर सरकार शिक्षा के प्रति ज्यादा ही उदार हो...

चाहत, कविता – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह - नालागढ़ वैसे तो मैं भी सच बोलना चाहता हूँ मगर मुश्किल ये है, जिंदा भी रहना चाहता हूँ! ये पत्थरों का शहर है और मैं आइनों का...

एडजस्टमेंट, लघुकथा – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह - नालागढ़ मृदुल को ठीक 10 बजे स्नेहा से मिलने जाना था| वैसे तो वह पढ़ा लिखा ऊँचे कद का सुन्दर नौजवान था...

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