शिमला जिला प्रशासन ने आगामी त्योहारों के मद्देनजर पटाखों और आतिशबाजी के अवैध भंडारण, परिवहन और बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए कमर कस ली है। जिला दंडाधिकारी अनुपम कश्यप के आदेशों के तहत तहसील और उप-तहसील स्तर पर विशेष ‘संयुक्त निरीक्षण समितियों’ का गठन किया गया है, जो क्षेत्र में नियमों की कड़ी निगरानी करेंगी। इन समितियों की कमान संबंधित तहसीलदारों के हाथों में होगी और इनमें नायब तहसीलदार, पुलिस थाना प्रभारी, अग्निशमन अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि, आबकारी एवं कराधान अधिकारी, स्थानीय निकायों या पंचायती राज संस्थाओं के सदस्य तथा राजस्व विभाग के अधिकारी शामिल किए गए हैं। उपमंडलाधिकारी इन सभी टीमों के कार्यों का समन्वय करेंगे और जरूरत पड़ने पर अन्य अधिकारियों को भी इसमें जोड़ सकेंगे।
सुरक्षा और नियमों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए जिला पुलिस प्रमुख द्वारा प्रवेश द्वारों, बॉर्डर एरिया, नेशनल हाईवे और अंतर-जिला मार्गों पर विशेष नाके और मोबाइल टीमें तैनात की जा रही हैं। वाहनों में ले जाए जा रहे पटाखों के लाइसेंस, परमिट, जीएसटी/ई-वे बिल, मात्रा और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच होगी। समितियां यह भी सुनिश्चित करेंगी कि पटाखों का कारोबार केवल तय नियमों और वैध लाइसेंस प्राप्त परिसरों में ही हो, साथ ही अग्निशमन उपकरणों और पर्यावरण से जुड़े नियमों की भी जांच की जाएगी। अस्पतालों, स्कूलों, आवासीय कॉलोनियों और घने बाजारों के आसपास विशेष नजर रखी जाएगी, जबकि सड़क किनारे लगने वाली अस्थायी दुकानों और बिना अनुमति मोबाइल स्टालों के संचालन पर पूरी तरह रोक रहेगी।
नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध विस्फोटक अधिनियम-1884, विस्फोटक नियम-2008, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 और पर्यावरण संरक्षण कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें पटाखों का स्टॉक जब्त करना, परिसर सील करना और लाइसेंस रद्द करना शामिल है। सभी गठित समितियों को निरीक्षण के तीन दिन के भीतर अपनी शुरुआती रिपोर्ट संबंधित एसडीएम को सौंपनी होगी, जिसके बाद त्योहारों के दौरान हर सोमवार को साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट उपायुक्त कार्यालय को भेजी जाएगी। प्रशासन के ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और त्योहारी सीजन की समाप्ति तक प्रभावी रहेंगे।
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