अपनी बोली अपनी पछ्यान: डॉक्टर जय अनजान

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डॉक्टर जय अनजान
डॉक्टर जय अनजान

जिथी नी ओ कोई पुछ पछ्यान,
ऊथी नी देने चैंदे ज्यादा प्राण,
से जे करो सारे अपणा ही गुणगान,
तिसरे पाओ जुकी जुकी ने बछ्यान।

जेड़ा चलाओ अपणा ही फरमान,
तिसरा कदी बी नी करो आदर सम्मान,
से जे बनो अपूजो बौत मीणा,
तिसरे दण्दा रा जरूर कडओ कीड़ा।

जेड़ा करदा सबिरी इज्जत मान,
तिसरा करना चैंदा खूब आदर सम्मान,
जेड़ा बोलदा मुंहां पर सारी गल,
तिसरिया गल्ला रा जरूर निकालो कोई हल ।

जेड़ा रहो हर किसी ते परेशान,
समझो तिस करना जरूर कोई नुकसान,
जेड़ा करदा हर रोज अरदास,
से कदी बी नी हुई सकदा बदमाश।

तुहें बी सारे करो हूं ए सोच बचार,
अपनिया बोलिया रा करो खूब प्रचार,
नवियाँ पीढ़ियां जो बी सखाओ अपनी मां बोलिया रे संस्कार,
ताईं हूना तिना सबिरा बेड़ा पार।

अपनी बोली अपनी पछ्यान: डॉक्टर जय अनजान

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