विश्वास: एक लघुकथा

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रणजोध सिंह 

रणजोध सिंह 

सेठ धनाराम जी दर्द से कहराते हुए गांव के मशहूर वैद्य जी के पास पहुंचे और आते ही लगभग चिल्लाते हुए बोले, “वैद्य जी मेरे पेट में बहुत तेज दर्द हो रहा है, कृपया मुझे शीघ्र दवाई दें अन्यथा मैं मर जाऊंगा।” वैद्य जी ने उसकी नब्ज़ पकड़ी और पाया कि सेठ को कोई गंभीर बीमारी नहीं अपितु केवल वात-रोग है। वह कहने ही वाले थे, “कोई चिंता का विषय नहीं है आप थोड़ी सी अजवाइन खा लीजिए, आपका रोग ठीक हो जाएगा।” मगर फिर उन्हें ध्यान आया कि धनाराम जैसे अमीर व्यक्ति को इतने साधारण से नुस्खे पर विश्वास नहीं आएगा। उनका रोग तब तक ठीक नहीं होगा जब तक वह कोई दुर्लभ अथवा महंगी दवाई न खा लें।

अतः वे अपनी झोपड़ी के भीतर गए और थोड़ी देर बाद चूल्हे से राख लेकर बाहर आए और सेठ धनाराम से बोले, “यह अभिमंत्रित राख दुर्लभ जड़ी-बूटियों से बनी है। इसकी एक-एक पुड़ियां दिन में तीन बार लेनी है। मगर याद रहे इस पुड़िया के साथ एक चम्मच अजवाइन लेना भी अनिवार्य है। ईश्वर आपका भला करेगा। सेठ ने वैद्य जी की सलाह पर अमल किया और तुरंत स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर लिया।

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