आई लोहड़ी: खुशियों, परंपरा और एकता का उत्सव
डॉक्टर जय महलवाल

आई लोहड़ी, आई लोहड़ी,
तियां जे मिली रै हुएं तिल चौली ,
कने मिली रे हुएं गुड़ मूंगफली,
तियां ई दिलां जो मल्याईं लोहड़ी।


बच्चे हुवां ए खुश लोहड़ी गाने जो,
स्कीमा बनाई बनाई ने,
खुशिया खुशियां ने त्यार हुवाये,
अड पड़ोसा जो जाने जो।


सारे गिले शिकवे भुलाई कने ,
बच्चे बड़े प्यारा ने लोहड़ी गांदे,
घरा घरा जायिने रेवड़ी मूंगफली,
गच्चक कने पैसे गुरांदे।


पहिले बनांदे थे लोहड़िया त्याडे,
बौत सारी तिल चौली ,
दिना जो खानी घीऊ खिचड़ी ,
फेरी मजे ने धूप लौणी।


जय बी बोल्दा तुहां जो बारंबार,
साला च एक बारी ई औंदा ए त्योहार,
छडा हूण सारे गिले शिकवे,
मुबारक हो तुहाँ जो लोहड़िया रा त्योहार।

लोहड़ी

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