बच्चों से खतरनाक किस्म की मजदूरी कराना गंभीर अपराध: विवेक खनाल

Date:

Share post:

वरिष्ठ सिविल जज एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अतिरिक्त सचिव विवेक खनाल ने कहा है कि बच्चों से खतरनाक किस्म की मज़दूरी कराना गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि 14 साल के अधिक आयु के बच्चों से ढाबे में 6 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकता। उन्हें तीन घन्टे के बाद एक घन्टे का रेस्ट दिया जाना जरूरी है।  वह उमंग फाउंडेशन द्वारा “मज़दूरों के कानूनी अधिकार, समस्याएं और समाधान” विषय पर वेबिनार में बोल रहे थे। उन्होंने युवाओं के सवालों के जवाब भी दिए। उन्होंने कहा कि असंगठित मजदूरों के शोषण का खतरा ज्यादा होता है। देश की जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद का 50% हिस्सा असंगठित मजदूरों के योगदान से ही अर्जित होता है। कार्यक्रम के संयोजक एवं समाजशास्त्र में पीएचडी कर रहे अभिषेक भागड़ा के अनुसार विवेक खनाल ने संगठित एवं असंगठित श्रमिकों से जुड़े विभिन्न कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने कहा की 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को खतरनाक किस्म के कामों में नहीं लगाया जा सकता। इनमें औद्योगिक राख, अंगारे, बंदरगाह, बूचड़खाना, बीड़ी, पटाखा, रेलवे निर्माण, कालीन, पेंटिंग एवं डाईंग आदि से जुड़े कार्य शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि 14 से 18 वर्ष तक के बच्चे रेस्टोरेंट या ढाबे में काम के तय 6 घंटे तक ही काम कर सकते हैं। शाम 7 बजे से सुबह 8 बजे के बीच उन से काम नहीं लिया जा सकता। उन्होंने बताया कि भवन निर्माण एवं अन्य कामगार बोर्ड में पंजीकृत होने के बाद श्रमिकों को अनेक प्रकार की सुविधाएं एवं सामाजिक सुरक्षा मिल जाती है। विवेक खनाल के अनुसार असंगठित मजदूरों के लिए कानून भी काफी कम हैं। जबकि उनकी स्थिति ज्यादा खराब होती है। उन्होंने बताया कि मनरेगा के अंतर्गत काम करने वाली महिला मजदूरों के बच्चों को संभालने के लिए उन्हीं में से एक वेतन देकर आया का काम भी दिया जाता है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अतिरिक्त सचिव ने कहा कि कि प्राधिकरण द्वारा समाज के जिन वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता दी जाती है उसमें एक श्रेणी मजदूरों की भी है। इसके अतिरिक्त महिला, दिव्यांग, ट्रांसजेंडर, बच्चे, अनुसूचित जाति एवं जनजाति, और तीन लाख से कम वार्षिक आय वाले बुजुर्ग इस योजना में शामिल हैं। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बद्दी में मजदूरों के लिए एक विशेष प्रकोष्ठ स्थापित किया गया है। इसके अलावा विभिन्न जिलों में वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र चलाए जा रहे हैं। एक अलग पोर्टल पर सरकार ई-श्रम कार्ड भी बना रही है। कार्यक्रम के संचालन में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों – मुकेश कुमार, दीक्षा वशिष्ठ, उदय वर्मा, विशाल और अभिषेक भागड़ा ने सहयोग दिया।

Daily News Bulletin

Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related articles

Shimla Book Fair 2026 Brings Worlds of Books to Hills

The literary spirit is set to return to the hills as the Shimla Book Fair 2026 will be...

गेयटी थिएटर में ‘बिष्टी लाणी’ ने बिखेरा हास्य का रंग

अंतरराष्ट्रीय शिमला समर फेस्टिवल-2026 के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में मंगलवार शाम ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में हास्य नाटक...

CM Sukhu Raises Key Financial Demands at NITI Aayog

CM Sukhu raised key financial and development issues of Himachal Pradesh at the 11th Governing Council meeting of...

शिमला ग्रीष्मोत्सव वॉलीबॉल में रोमांच चरम पर

अंतर्राष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव-2026 के तहत आयोजित पहली एंटी चिट्टा अंतर जिला वॉलीबॉल चैंपियनशिप में रोमांचक मुकाबलों के बाद...