भारतीय इतिहास को स्थापित करने की आवश्यकता पर साहसपूर्वक बल : शिव प्रताप शुक्ला

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राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने देश के गौरवशाली इतिहास को पुनः स्थापित करने के लिए साहस के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत को विश्व गुरु के रूप में स्वीकार कर रही है और हमें भी इस भावना को स्वीकार करना चाहिए। राज्यपाल ने यह बात आज शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में ठाकुर राम सिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए कही। इस अवसर पर उन्होंने डॉ. भाग चंद चौहान द्वारा लिखित पुस्तक द नॉलेज सिस्टम ऑफ इंडिया और डॉ. कंवर चंद्रदीप और राजीव कुमार द्वारा संपादित पुस्तक ऐन एंथोलोजी ऑफ डिस्कोर्सेज ऑन इंडिया का विमोचन किया।


राज्यपाल ने कहा कि आज भारत दुनिया मंे नवाचार और ज्ञान सृजन में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि भारत के उच्च शिक्षा संस्थान, अनुसंधान प्रयोगशालाएं और प्रौद्योगिकी केंद्र विविध क्षेत्रों में देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के युवा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवीनतम प्रगति को अपनाकर अपने पूर्वजों की विरासत को अपना रहे हैं, जिससे परंपरा और आधुनिकता का एक अनूठा मिश्रण तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी विरासत और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन वेदों को विदेशी आक्रमणकारियों ने चरवाहों की भाषा कहा था, उन पर मैक्स मयूलर जैसे महान व्यक्ति ने विदेशों में ले जाकर शोध किया और हमें उनके बारे में शिक्षित किया।

उन्होंने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि उन्हें वर्तमान में जीने की जरूरत है तभी वे आज की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे वर्तमान की सोच से ही समाज और राष्ट्र के प्रति सही सोच अपना सकते हैं। इससे पूर्व, कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि आक्रमणकारियों द्वारा लिखे गए लेखांे के आधार पर भारत का इतिहास नहीं लिखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इतिहास के कई स्रोत हैं और जब हम उन स्रोतों को जानेंगे तभी हम भारत के इतिहास को समझ पाएंगे। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला और केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने राज्यपाल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय में इसी सत्र से यूजीसी नेट, हिंदी का पाठ्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इस अवसर पर ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी के निदेशक डॉ. चेत राम गर्ग ने राज्यपाल का स्वागत किया।

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