February 1, 2026

चम्मचे (चम्मचों की कारगुजारी): डॉo कमल केo प्यासा

Date:

Share post:

डॉo कमल केo प्यासा
प्रेषक : डॉ. कमल के . प्यासा

चापलुसियो की ही खाते हैं चम्मचे !
चम्मचागिरी मेंअव्वल होते हैं
चम्मचे!
दुवा सलाम करते नहीं थकते चम्मचे!
कभी रूठ जाते कभी मान जाते हैं
चम्मचे !
फिर भी चिपके देखे गए चम्मचे !
कहीं बिगाड़ते सुधारते देखे गए
चम्मचे !
ये फूक मेंआ जाएं चम्मचे,
तो व्योम को भी जमी पे उतारे चम्मचे !
फिर कुर्सी पे बैठा हार पहना दें
चम्मचे !
चाहे तो मिट्टी धूल चटा दे चम्मचे !
बच के रहना इनसे, भला ये तो ठहरे चम्मचे !
क्योंकि हैं नहीं बक्शते किसी को चम्मचे !
यही मौसमानुसार बदलते हैं चम्म चे !
चढ़ते सूरज को सलाम करते हैं
चम्मचे !
वैसे तो भांत भांत के होते हैं चम्म चे,
कहीं सोने चांदी तो कहीं पीतल लोहे के चम्मचे !
और वक्त वक्त पे ढलते देखे तुम व हमी चम्मचे !
खाते पीते डकारते देखे बहुतेरे चम्मचे !
कहीं नाचते तो कहीं नचाते देखे चम्मचे !
छोटे मोटे ,नाटे हल्के,टिड्डे फिड्डे जैसे देखे हैं चम्मचे!
कैसे कैसे फरमेदार होते हैं चम्मचे,
चापलूसी की ही तो खाते हैं चम्मचे !

चम्मचे (चम्मचों की कारगुजारी): डॉo कमल केo प्यासा

Daily News Bulletin

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related articles

ईको-टूरिज्म से अर्थव्यवस्था तक : हिमाचल को नई ताक़त

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2024-25...

Young Leader, Big Win: AHSB Student Clinches National Silver

Auckland House School for Boys (AHSB), Shimla, celebrated a proud moment as Class X student Sourish Thakur successfully...

माय लविंग फैमिली – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह - नालागढ़ उस दिन संध्याकाल के समय, मैं सपत्नीक अपने अभिन्न मित्र के घर गया हुआ था|...

Celebrating India’s Heritage at Bharat Parv

As the echoes of India’s 77th Republic Day faded, the historic Red Fort became a vibrant showcase of...