हिमाचल प्रदेश की पावन धरा (देवभूमि) हमें शुद्ध पर्यावरण का संदेश देती है और इस संदेश को धरातल पर उतारना अधिक से अधिक पौधारोपण से ही संभव है। यह विचार मीडिया वैलबीइंग एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया सीनियर वाइस प्रेसिडेंट व वरिष्ठ पत्रकार संजय भुटानी ने व्यक्त किए। अवसर था शिमला स्थित हरियाणा अतिथि गृह में ‘त्रिवेणी’ (बड़, पीपल और नीम) रोपण कार्यक्रम का, जहाँ उन्होंने अपनी धर्मपत्नी मुक्ता व अन्य गणमान्यों के साथ प्रख्यात पर्यावरणविद त्रिवेणी बाबा के पावन सान्निध्य में त्रिवेणी रोपित की। संजय भुटानी ने देवभूमि में त्रिवेणी लगाने को अपना सौभाग्य बताया।
इस मौके पर विख्यात त्रिवेणी बाबा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों से एक विशेष आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी कोने से आने वाले पर्यटक अपने साथ एक पौधा जरूर लाएं और उसे यहाँ की मिट्टी में रोपें, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां भी इस खूबसूरत धरा का आनंद पर्यटक के रूप में ले सकें।
उल्लेखनीय है कि त्रिवेणी बाबा ने पर्यावरण संरक्षण की जिस मुहिम की शुरुआत की थी, उसका व्यापक असर अब न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश में देखने को मिल रहा है। पर्यावरण बचाने के प्रति उनके जुनून का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 35 वर्षों में ऐसा कोई दिन नहीं बीता, जब बाबा ने कोई त्रिवेणी या पौधा न लगाया हो।
जन-सहयोग के माध्यम से त्रिवेणी बाबा अब तक 5 लाख त्रिवेणी और करीब 50 लाख पौधे लगा चुके हैं। उनका आगामी लक्ष्य 1 करोड़ पौधे और 10 लाख त्रिवेणी लगाकर इसके महत्व को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है। पिछले तीन दशकों से उन्होंने पौधारोपण को मानवीय संस्कारों, रीति-रिवाजों और सामाजिक रस्मों से जोड़ने का सराहनीय कार्य किया है।
त्रिवेणी बाबा का मानना है कि यदि प्रकृति को बचाना है, तो हर नागरिक को आज से ही अपने जीवन में पांच आदतों को शामिल करना होगा। इसमें पहला अपना जन्मदिन पेड़ लगाकर मनाना व जीवन में कम से कम एक त्रिवेणी लगाना, दूसरा दैनिक जीवन में पानी का सदुपयोग करना, तीसरा प्लास्टिक की जगह कपड़े या जूट के थैले का प्रयोग करना, चौथा ऊर्जा की बचत करना और पांचवा भोजन की बर्बादी को रोकना शामिल है। इस गरिमामयी अवसर पर हरियाणा अतिथि गृह के कर्मचारी अमर सिंह, मीनू शर्मा, अजीत सिंह, राकेश और अमन सहित कई अन्य लोग भी मौजूद रहे।



