DFS जूंगा में विस्फोटक सुरक्षा सेमिनार

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निदेशालय फॉरेंसिक सेवाओं (DFS), जूंगा में आज से “विस्फोटक एवं गोला-बारूद: सुरक्षा, हैंडलिंग और फोरेंसिक विश्लेषण” पर दो दिवसीय सेमिनार का शुभारंभ हुआ, जो 12 मार्च 2026 तक चलेगा।

इस सेमिनार का उद्घाटन के. के. पंत, IAS, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्चुअली किया। उद्घाटन भाषण में उन्होंने विस्फोटक और गोला-बारूद से संबंधित मामलों की सुरक्षा और सही हैंडलिंग में फोरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने 1 जनवरी 2026 को नालागढ़ में हुए विस्फोटक हादसे का उदाहरण देते हुए कहा कि फोरेंसिक विशेषज्ञों को भौतिक साक्ष्य संग्रह और संरक्षण में गहन ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है।

सेमिनार में दो प्रमुख विशेषज्ञों ने विशेष व्याख्यान दिए। डॉ. ओंकार एस. मोंढे, पूर्व महाप्रबंधक, इंडियन ऑर्डिनेंस फैक्ट्री, बदमाल, ओडिशा ने विस्फोटक और प्रोपेलेंट्स का परिचय, उत्पादन विधियां, थर्मोकेमिस्ट्री, प्रारंभिक विधियां और फोरेंसिक विश्लेषण के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। वहीं, देबाब्रत मल्लिक, पूर्व महाप्रबंधक, इंडियन ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों ने विस्फोटकों की विशेषताएं जैसे डेटोनेशन, कमर्शियल विस्फोटक, सुरक्षा UNHD, Quantity Distance (QD), कम्पैटिबिलिटी ग्रुप्स, इनसेंसिटिव म्यूनिशन्स और इंटरनल बैलिस्टिक्स पर व्याख्यान दिया।

इस सेमिनार में राज्य फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी, जूंगा, क्षेत्रीय फोरेंसिक साइंस लैब, धर्मशाला और मंडी, तथा जिला फोरेंसिक इकाइयां (DFUs) बड्डी, बिलासपुर और नूरपुर के फोरेंसिक विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

इस अवसर पर डॉ. मीनाक्षी महाजन, निदेशक फोरेंसिक सेवाएं, हिमाचल प्रदेश ने अतिथि वक्ताओं का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि विस्फोटक और गोला-बारूद की सुरक्षा व हैंडलिंग से संबंधित प्रशिक्षण फोरेंसिक विशेषज्ञों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे सेमिनार फोरेंसिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का अभिन्न हिस्सा हैं और निदेशालय नियमित रूप से फोरेंसिक विशेषज्ञों, जांच अधिकारियों, पुलिस, अभियोजन अधिकारियों, चिकित्सा अधिकारियों और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के कर्मियों के ज्ञान को अपडेट करने के लिए कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करता है।

उप रोजगार कार्यालयों में कैम्पस इंटरव्यू का आयोजन

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