ईस्ट इंडिया कंपनी व जारी सिक्के

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31 दिसंबर, 1600 को इंग्लैंड के कुछ व्यापारियों द्वारा पूर्वी देशों से व्यापार करने के लिए जिस कंपनी का गठन किया गया था, उसका नाम ईस्ट इंडिया कंपनी रखा गया था। जिसे इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा भारत में व्यापार करने की अनुमति प्रदान की गई थी। भारत के साथ व्यापार का मुख्य उद्देश्य यहाँ के मसाले, सूती कपड़ा, रेशम, नील, चाय व शोरा था। 1613 ईस्वी में मुग़ल सम्राट जहांगीर से अनुमति लेकर कंपनी द्वारा अपना पहला व्यापारिक संस्थान सूरत में स्थापित किया गया। इसके साथ ही साथ कुछ दिनों बाद मुंबई, मद्रास व कलकत्ता में भी कंपनी के मुख्य केंद्र स्थापित कर दिए गए।

बाद में अंग्रेजों की रुचि भारत की राजनीति की ओर बढ़ने लगी, फलस्वरूप 1757 ईस्वी में बंगाल के नवाब को प्लासी के युद्ध में हराकर कंपनी द्वारा राजनीतिक गतिविधियों के साथ शासन का कार्य भी शुरू हो गया। 1764 ईस्वी में बक्सर की लड़ाई के पश्चात कंपनी द्वारा बंगाल, बिहार व उड़ीसा से कर लेना शुरू कर दिया गया, जिसका भारी विरोध किया गया और उसी विरोध के बढ़ने के फलस्वरूप 1857 में एक क्रांति के रूप में कंपनी व अंग्रेजों के विरुद्ध बगावत खड़ी हो गई। परिणामस्वरूप 1858 ईस्वी में कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया और शासन व्यवस्था ब्रिटिश सरकार ने अपने हाथ में ले ली। बाद में कंपनी को विधिवत रूप से 1874 ईस्वी में बंद कर दिया गया।

कंपनी ने अपनी व्यापारिक सुविधा के लिए 19 अगस्त, 1757 में कलकत्ता से अपने सिक्के भी ढालने शुरू किए थे, जो कि मुग़ल सिक्कों की तरह हुआ करते थे। बाद में 1835 ईस्वी में समस्त भारत में एक जैसे सिक्कों का चलन शुरू हो गया था। 1835 ईस्वी में सिक्का अधिनियम के अंतर्गत चांदी का एक रुपये का सिक्का भी चलाया गया, जिस पर ब्रिटिश राजा या महारानी की छवि बनी होती थी। सिक्के ढालने के तीन प्रशासनिक केंद्र थे, जिनमें बंगाल की टकसाल से मुख्य रूप से मुग़ल सम्राटों के नाम (शाह आलम द्वितीय) के फ़ारसी लिपि वाले रुपये के सिक्के बनते थे।

मुंबई की टकसाल से यूरोपीय शैली के कंपनी के लोगो वाले सिक्के ढाले जाते थे, जो कि बाद में स्थानीय व्यापार के लिए मुग़ल शैली में बनने लगे थे।

मद्रास टकसाल से सोने के पैगोडा व चांदी के फणम सिक्के बनते थे, जिन पर देवी-देवता या मंदिर आदि का चित्रण होता था।

ईस्ट इंडिया कंपनी का सबसे कीमती सिक्का सोने का होता था, जिसकी उस समय क़ीमत 15 रुपये होती थी। चांदी का एक रुपया 11.66 ग्राम का होता था। आम लेन-देन में तांबे के आना, आधा आना, 1/4 आना (एक पैसा) व पाई होती थीं।

ईस्ट इंडिया के सिक्कों का विवरण:

  1. सिक्का चांदी विलियम IV – 1835 सिक्के की धातु: चांदी सिक्के का आकार: गोलाकार सिक्के का व्यास: 30.5 मिमी सिक्के की मोटाई: 1.82 मिमी सिक्के का भार: 11.66 ग्राम सिक्के का काल: 19वीं शताब्दी सिक्के पर लिपि: लैटिन/अंग्रेजी व फ़ारसी/उर्दू सिक्का संग्रहकर्ता: कमल के. प्यासा (निजी संग्रह), प्रूथी संग्रहालय, मंडी सिक्का प्राप्ति स्थान: मंडी, अपनी खरीद सिक्के का विवरण: ईस्ट इंडिया कंपनी के चांदी वाले इस सिक्के के एक ओर इंग्लैंड के बादशाह विलियम IV की छवि की मुखाकृति दिखाई गई है, जिसमें बादशाह का मुँह सिक्के के दायीं ओर दिखाया गया है और आकृति के दोनों ओर गोलाकार शैली से लैटिन/अंग्रेजी में ‘WILLIAM IV’ मुँह के आगे की ओर व ‘KING’ उसके सामने दूसरी ओर आ जाता है। इसी सिक्के के दूसरी ओर वैसे ही गोलाकार शैली से ‘EAST INDIA COMPANY’ व सिक्के के मध्य में लैटिन लिपि व अंग्रेजी में सिक्के का मूल्य (ONE RUPEE), इसी के नीचे फ़ारसी/उर्दू में ‘एक रुपया’ लिखा देखा जा सकता है। सबसे नीचे वर्ष 1835 आ जाता है।

  2. सिक्का चांदी महारानी विक्टोरिया – 1840 सिक्के की धातु: चांदी सिक्के का आकार: गोलाकार सिक्के का व्यास: 30.5 मिमी सिक्के की मोटाई: 1.82 मिमी सिक्के का भार: 11.66 ग्राम सिक्के का काल: 19वीं शताब्दी सिक्के पर लिपि: लैटिन/अंग्रेजी व फ़ारसी/उर्दू सिक्का संग्रहकर्ता: कमल के. प्यासा (निजी संग्रह), प्रूथी संग्रहालय, मंडी सिक्का प्राप्ति स्थान: मंडी, अपनी खरीद सिक्के का विवरण: ईस्ट इंडिया कंपनी के इस चांदी के सिक्के के एक ओर महारानी विक्टोरिया के चेहरे की आकृति दिखाई गई है, जिसमें रानी का मुँह सिक्के के बाएँ ओर दिखाया गया है। इस सिक्के में भी गोलाकार शैली में ‘VICTORIA’ लैटिन/अंग्रेजी में मुँह के आगे की ओर व ‘QUEEN’ वैसे ही गोलाकार शैली में सामने लिखा देखा जा सकता है। सिक्के के दूसरी ओर वैसे ही गोलाकार शैली में ‘EAST INDIA COMPANY’ लैटिन/अंग्रेजी में पढ़ा जा सकता है। मध्य में लैटिन में ही सिक्के का मूल्य (ONE RUPEE) अंग्रेजी में पढ़ा जा सकता है। सबसे नीचे फ़ारसी/उर्दू में ‘एक रुपया’ व नीचे वर्ष 1840 लिखा देखा जा सकता है।

  3. सिक्का आधा आना सिक्के की धातु: तांबा सिक्के का आकार: गोलाकार सिक्के का व्यास: 30 मिमी सिक्के की मोटाई: 2.4 मिमी सिक्के का भार: 12.34 ग्राम सिक्के का काल: 19वीं शताब्दी सिक्के पर लिपि: लैटिन/अंग्रेजी व फ़ारसी/उर्दू सिक्का संग्रहकर्ता: कमल के. प्यासा (निजी संग्रह), प्रूथी संग्रहालय, मंडी सिक्का प्राप्ति स्थान: मंडी, अपनी खरीद सिक्का विवरण: तांबे के इस आधे आने के सिक्के के एक ओर शाही प्रतीक में दो बड़े शेरों को एक हाथ से ढाल को पकड़े व दूसरे हाथ से झंडा उठाए दिखाया गया है, उठाए दोनों झंडों के मध्य एक अन्य छोटे शेर को कुछ पकड़े दिखाया गया है। बड़े शेरों के नीचे की ओर सिक्के के ढलाई वर्ष को अंकित देखा जा सकता है, जिसके साथ ही नीचे दोनों ओर के रिबनों पर लैटिन में “AUSP: REG: & SEN: ANG:” लिखा मिलता है, जिसका अर्थ “इंग्लैंड के राजा और संसद के आदेश से” होता है। इसी सिक्के के दूसरी ओर दो सुंदर पत्तेदार टहनियों के मध्य में ऊपर फ़ारसी लिपि में ‘दो पाई’ व ‘HALF ANNA’ लैटिन/अंग्रेजी में लिखा मिलता है व चारों ओर गोलाकार शैली में ‘EAST INDIA COMPANY’ लैटिन/अंग्रेजी में लिखा भी देखा जा सकता है।

  4. पाव या 1/4 आना विलियम IV (1835 ईस्वी) सिक्के की धातु: तांबा सिक्के का आकार: गोलाकार सिक्के का व्यास: 26 मिमी सिक्के की मोटाई: 1.5 मिमी सिक्के का भार: 6.45 ग्राम सिक्के का काल: 19वीं शताब्दी सिक्के पर लिपि: लैटिन/अंग्रेजी व फ़ारसी/उर्दू सिक्का संग्रहकर्ता: कमल के. प्यासा (निजी संग्रह), प्रूथी संग्रहालय, मंडी सिक्का प्राप्ति स्थान: मंडी, अपनी खरीद सिक्के का विवरण: तांबे के इस ईस्ट इंडिया कंपनी के पाव आने वाले सिक्के के एक ओर आधे आने वाले सिक्के जैसे ही शाही निशान जिसमें दो बड़े शेर एक हाथ से ढाल को पकड़े व दूसरे हाथ में झंडा उठाए हैं, ऊपर दोनों झंडों के मध्य वैसे ही एक छोटे से शेर को कुछ पकड़े देखा जा सकता है। बड़े शेरों के नीचे की ओर वैसे ही सिक्का निर्माण का ईस्वी वर्ष 1835 व साथ के रिबनों में लैटिन/अंग्रेजी में “AUSP: REG: & SEN: ANG:” लिखा देखा जा सकता है। वैसे ही इस सिक्के के दूसरी तरफ भी दो पत्तेदार सुंदर टहनियों के मध्य में ऊपर की ओर फ़ारसी/उर्दू में ‘एक पाई’ व लैटिन/अंग्रेजी में ‘QUARTER ANNA’ लिखा मिलता है। फिर चारों ओर गोलाकार शैली में ‘EAST INDIA COMPANY’, लैटिन/अंग्रेजी में वैसे ही आधे आने की तरह लिखा मिलता है। सबसे नीचे सिक्के के निर्माण वर्ष का अंकन रहता है।

  5. पाव या 1/4 आना महारानी विक्टोरिया (1858 ईस्वी) सिक्के की धातु: तांबा सिक्के का आकार: गोलाकार सिक्के का व्यास: 26 मिमी सिक्के की मोटाई: 1.4 मिमी सिक्के का भार: 6.4 ग्राम सिक्के का काल: 19वीं शताब्दी सिक्के की लिपि: लैटिन/अंग्रेजी व फ़ारसी/उर्दू सिक्का संग्रहकर्ता: कमल के. प्यासा (निजी संग्रह), प्रूथी संग्रहालय, मंडी सिक्का प्राप्ति स्थान: मंडी, अपनी खरीद सिक्के का विवरण: मलका/महारानी विक्टोरिया के एक पैसे वाले तांबे के इस सिक्के में एक ओर महारानी विक्टोरिया का चित्रण बादशाह विलियम IV की तरह ही किया गया है, शेष सिक्के में सभी कुछ ऊपर वर्णित एक पैसे के (विलियम IV) जैसे ही है। हाँ, इसमें सिक्के का निर्माण वर्ष 1858 लिखा मिलता है।

स्वतंत्रता दिवस और शहीद ऊधम सिंह

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