पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव में उच्च न्यायालय के निर्देशों का स्वागत करते हुए राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी नाक बचाने के चक्कर में संविधान, लोकतंत्र और जनादेश का अपमान कर रहे हैं। चुनाव टालने के लिए सरकार आपदा प्रबंधन एक्ट जैसे हथकंडे अपनाती रही, जिससे न्यायालयों में उसकी बार-बार फ़ज़ीहत हुई है। ठाकुर ने दावा किया कि जनादेश से घबराई कांग्रेस को प्रदेश के दस में से नौ जिलों में जिला परिषद प्रत्याशी तक नहीं मिले और अब हार के डर से वह चुनाव कराने से भाग रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चुनावों को टालकर अब भाजपा समर्थित जन प्रतिनिधियों को डरा-धमकाकर समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 92 ब्लॉक समितियों में से 51 अध्यक्ष और 54 उपाध्यक्ष पदों पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी चुने गए हैं, जबकि कांग्रेस बेहद कम सीटों पर सिमट गई है। जयराम ठाकुर ने तंज कसा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं बहाल करने के बजाय सरकार ने केंद्र से मिले राहत पैकेज के पैसे से अपने तीन साल का जश्न मनाया, जो बेहद शर्मनाक है।
अंकुश इंदोरिया मामले में माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय का जिक्र करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि कोर्ट ने साफ किया है कि पुलिस जांच का बहाना बनाकर चुनाव टालना पूरी तरह अवैध, गैर-कानूनी और अधिनायकवादी सोच का प्रतीक है। पंचायती राज अधिनियम के तहत शपथ के तुरंत बाद चुनाव कराना अनिवार्य है, लेकिन सरकार प्रशासनिक अधिकारों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि अदालत द्वारा सरकार के इस गैर-लोकतांत्रिक और तानाशाही रवैये पर की गई तल्ख टिप्पणी के बाद भी मुख्यमंत्री का बाज न आना यह साबित करता है कि वे लोकतंत्र में तानाशाही चलाना चाहते हैं।
वादे बनाम हकीकत: जयराम ठाकुर ने खोली प्रशासनिक व्यवस्था की पोल



