हिम सिने सोसायटी द्वारा गेयटी थियेटर, शिमला में लघु फिल्म पुरस्कार वितरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें युवा फिल्म निर्माताओं की रचनात्मकता और सामाजिक संदेशों से भरपूर फिल्मों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म समीक्षक दीपक दुआ ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए कहा कि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि विचारों और मानसिकता को गहराई से प्रभावित करने वाला माध्यम है। उन्होंने कहा कि दर्शकों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए सोच-समझकर सामग्री का चयन करना चाहिए, क्योंकि फिल्में समाज की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
दीपक दुआ ने राष्ट्रभावना और सामाजिक सरोकारों पर आधारित फिल्मों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आज ऐसे सिनेमा की जरूरत है जो समाज और परिवार को जोड़ने का काम करे, न कि तोड़ने का। उन्होंने “कुटुंब प्रबोधन” जैसे विषयों और प्रेरणादायक सीरीज का उल्लेख करते हुए कहा कि दर्शकों को ऐसी सामग्री को बढ़ावा देना चाहिए जो मनोरंजन के साथ जीवन मूल्यों को भी मजबूत करे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख प्रताप समयाल ने कहा कि “पांच परिवर्तन” के अंतर्गत विविध सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर गुणवत्तापूर्ण फिल्मों का निर्माण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अच्छी फिल्में समाज के स्वभाव को सकारात्मक दिशा देती हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और नागरिक कर्तव्यों के पालन पर भी जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्ष आरती गुप्ता ने बताया कि प्रतियोगिता में कुल 28 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं, जिनका मूल्यांकन ज्यूरी सदस्यों प्रोफेसर शशिकांत और प्रकाश लोहमी द्वारा किया गया।
निर्णय के अनुसार प्रथम पुरस्कार नाहन के हर्ष को प्रदान किया गया। द्वितीय स्थान पर अभिमन्यु और प्रांशु बांशा रहे, जबकि तृतीय पुरस्कार नर्वदा शर्मा, रूपेन्द्र ठाकुर और जतिन कुमार को मिला। स्पेशल ज्यूरी अवार्ड “इंसानों का जंगल” लघु फिल्म के लिए ईशान पुंडीर को दिया गया।
इसके अतिरिक्त अनस खान, पूनम चौहान, सुशांत लखनपाल, आर्यन हरनोट/मनवर राणा, धीरेन सिंह, टिंकू, कृतिका ककड़, मीनाक्षी पंडित, प्रज्ज्वल शर्मा, प्रिया मिश्रा, राहुल चौहान, रितिक, श्वेता विश्वकर्मा, सौरूष गुलेरिया, सुनील ठाकुर, हर्षित शर्मा और विवेक मोहन सहित अन्य प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया। समारोह ने युवा फिल्म निर्माताओं को न केवल मंच प्रदान किया, बल्कि सामाजिक सरोकारों से जुड़ी फिल्मों के निर्माण की दिशा में एक नई प्रेरणा भी दी।



