द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउन्टेन्ट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की एमएसएमई एवं स्टार्टअप कमेटी द्वारा शिमला में दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर का रेजिडेंशियल कार्यक्रम “आईसीएआई–डीएफओ स्टेकहोल्डर्स रेजिडेंशियल मीट – एमएसएमई मंथन मीट 2026” का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 8 से 9 मई 2026 तक आयोजित होगा, जिसका उद्देश्य देश के एमएसएमई और स्टार्टअप सेक्टर की बदलती आवश्यकताओं, वित्तीय सशक्तिकरण और नवाचार को नई दिशा देना है।
कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जितन राम मांझी द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया। इस अवसर पर आईसीएआई एमएसएमई एवं स्टार्टअप कमेटी के चेयरमैन सीए ज्ञान चंद्र मिश्रा, वाइस-चेयरमैन सीए संजय कुमार अग्रवाल तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह मंच सरकारी विभागों, वित्तीय संस्थानों और इकोसिस्टम भागीदारों जैसे एनएसआईसी, जीईएम, केवीआईसी, लघु उद्योग भारती और अन्य औद्योगिक संगठनों को एक साथ लाकर एमएसएमई सेक्टर की चुनौतियों और समाधान पर व्यापक चर्चा का अवसर प्रदान करेगा।
दो दिवसीय इस आयोजन में एमएसएमई के विकास से जुड़े प्रमुख मुद्दों जैसे बाजार तक पहुंच, तकनीकी अपनाना, वित्तीय स्थिरता और नीति सुधारों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। “एमएसएमई संवाद” जैसे सत्रों में विशेषज्ञ सेक्टर की वास्तविक चुनौतियों और अवसरों पर प्रकाश डालेंगे। एक विशेष पैनल चर्चा में बाजार, तकनीक और वित्त तक पहुंच को आसान बनाने के लिए नीतिगत सुधारों और रणनीतियों पर विचार साझा किए जाएंगे। वहीं “अलाइनिंग बिजनेस फॉर्म्स विद गवर्नमेंट रेगुलेशंस एंड इंसेंटिव्स” सत्र में उद्यमियों को सरकारी योजनाओं और अनुपालन व्यवस्था को समझने में मदद दी जाएगी।
कार्यक्रम में प्रबंधन विकास और कौशल विकास पर आधारित सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य उद्यमिता क्षमता, प्रबंधकीय दक्षता और नवाचार को बढ़ावा देना है। साथ ही “प्रभावी परियोजना मूल्यांकन के माध्यम से एमएसएमई वित्त सशक्तिकरण” विषय पर तकनीकी सत्र में निवेश और ऋण सुविधा को सरल बनाने पर चर्चा होगी।
आईसीएआई ने एमएसएमई क्षेत्र के सशक्तिकरण के लिए पहले भी कई पहलें की हैं, जिनमें “आईसीएआई एमएसएमई महोत्सव 2025” को विश्व रिकॉर्ड में स्थान मिला, जिसमें एक ही दिन में हजारों उद्यमों को लाभ मिला। इसके अलावा देशभर में “एमएसएमई क्लिनिक” के माध्यम से नियमित मार्गदर्शन और परामर्श सेवाएं भी प्रदान की जाती हैं। यह आयोजन एमएसएमई सेक्टर को न केवल नई दिशा देने का प्रयास है, बल्कि भारत के आर्थिक विकास, आत्मनिर्भरता और नवाचार आधारित विकास मॉडल को भी मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



