हिमाचल : धातु अभिलेख, संदर्भ शिमला – डॉ. कमल के. प्यासा

Date:

Share post:

डॉ. कमल के. प्यासा – मण्डी

शिमला से मिलने वाले अभिलेखों में पाषाण व धातु, दोनों ही तरह के अभिलेख देखे गए हैं जो कि ब्राह्मी, शारदा व टांकरी लिपि के पाए गए हैं। धातु अभिलेखों में ताम्र पट्ट अभिलेखों के साथ ही यहां के धातु प्रतिमा अभिलेख भी विशेष महत्व रखते हैं। यहां से मिलने वाले धातु अभिलेखों में निम्न अभिलेख विशेष पहचान रखते है:

शिमला के धातु पट्ट व धातु प्रतिमा अभिलेख :

1.महिषासुरमर्दिनी प्रतिमा अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : धातु प्रतिमा अभिलेख।

अभिलेख काल : 7वीं – 9वीं शताब्दी के मध्य।

अभिलेख लिपि : ब्राह्मी ।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : हटेश्वरी मंदिर, हाटकोटी शिमला।

अभिलेख विवरण : देवी माता महिषासुरमर्दिनी का हाटकोटी मंदिर, हाटकोटी गांव में पब्बर नदी के निकट पत्थर पैगोडा शैली में बना है। दोहरी पैगोडा छत भी पत्थरों से ही बनी है। मंदिर के गर्भ गृह में मुख्य अष्ट भुज प्रतिमा देवी महिषासुरमर्दिनी (120 सेंटीमीटर ऊंची अष्ट धातु की) स्थापित है। ब्राह्मी लिपि में अभिलेख प्रतिमा के दोनों ओर देखा गया है, जिसमें प्रतिमा का निर्माण किस प्रयोजन व किस द्वारा कब करवाया गया, सारी दी गई है।

  1. निरथ ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : ताम्र धातु पट्ट अभिलेख।

अभिलेख काल : 7वीं- 8वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : ब्राह्मी, भाषा संस्कृत।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : सूर्य मंदिर निरथ, रामपुर शिमला।

अभिलेख विवरण : निरथ गांव रामपुर से लगभग 18किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यही सतलुज नदी के बाईं ओर ऊंचाई पर एक सुंदर शिखर शैली का सूर्य नारायण मंदिर बना है जिसमें भगवान सूर्य नारायण की मुख्य प्रतिमा के साथ शिवलिंग व अन्य देव प्रतिमाएं भी देखी जा सकती हैं। मंदिर के दर्शक मंडप (प्रवेश द्वार) पर सुंदर लकड़ी नक्काशी का कार्य देखा जा सकता है।

निरथ मंदिर के ताम्र पट्ट अभिलेख से जो कि ब्राह्मी/शारदा लिपि के संस्कृत में उत्कीर्ण है, से उस समय (पौरव राजवंश) की सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक जानकारी मिलती है। राजा समुद्र सेन द्वारा ब्राह्मणों को दी गई दान की भूमि की जानकारी मिलती है जो उस समय पौरव वंश के शासक थे। ताम्र पट्ट से सूर्य मंदिर की समस्त व्यवस्था व कार्य प्रणाली की जानकारी भी हो जाती है।

3.राविनगढ़ ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख काल : 18वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : टांकरी।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : राविनगढ़, जुब्बल शिमला।

अभिलेख विवरण : राविनगढ़ के शासक राणा हिम्मत सिंह (1787-1801ईस्वी), सुपुत्र राणा तार सिंह द्वारा जारी टांकरी लिपि के इस ताम्र पट्ट अभिलेख में ब्राह्मणों, मंदिरों को दान की गई भूमि का कारण, उनके नाम व सीमा क्षेत्र का ब्यौरा मिलता है। इनके साथ ही साथ क्षेत्र की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक स्थिति व जन आदेश की जानकारी भी ताम्र पट्ट अभिलेख में देखी जा सकती है। ऐसा ही अभिलेख राणा रुना सिंह का भी मिलता है। ताम्र पट्ट अभिलेख, भूरी सिंह म्यूजियम, चंबा में देखा जा सकता है।

  1. दरकोटी ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : धातु ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख काल : 19 वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : टांकरी, बोली क्योंथाली।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : दर कोटी, खड़ा पत्थर, शिमला।

अभिलेख विवरण : दरकोटी, खड़ा पत्थर के पास की एक छोटी सी रियासत थी, जो कि उस समय राणों के अधिकार में थी। बलराम राम द्वारा जारी इस टांकरी के ताम्र पट्ट अभिलेख से ब्राह्मणों व मंदिर को दान दी गई भूमि की जानकारी के साथ “लाग बाग”विशेष कर व्यवस्था कभी पता चलता है। लाग बाग कर किसानों से विशेष शर्तों व नियमों के अंतर्गत लिया जाता था। यह ताम्र पट अभिलेख राज्य संग्रहालय शिमला के संरक्षण में बताया जाता है।

5.राजा केहरी सिंह ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : धातु ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख काल : 17वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : टांकरी, बोली बुशहरी।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : रामपुर बुशहर, शिमला।

अभिलेख विवरण : रामपुर बुशहर के राजा केहरी सिंह अपने समय के जाने माने और सर्वगुण सम्पन्न शासक थे। जिसके जानकारी उनके टांकरी लिपि के ताम्र पट्ट अभिलेख से भी मिल जाती है। उन्होंने अपने कुशल नेतृत्व में क्योंथल, कोटखाई, कुमार सेन व ठियोग को मिला कर बुशहर राज्य का विस्तार किया था। तिब्बत के साथ मुगल युद्ध के समय तिब्बत की सहायता दे कर, इन्हें हंगरंग घाटी उपहार स्वरूप प्राप्त हुई थी। तिब्बत के साथ व्यापार करने के लिए लवी मेले का शुभारंभ भी राजा केहरी सिंह द्वारा किया गया था। कहते हैं कि केहरी सिंह की सूझ बुझ और इनकी विस्तार नीति को देखते हुवे बादशाह औरंगजेब के इन्हें छतर पति की उपाधि भी प्रदान की थी। इनके इसी ताम्र अभिलेख से कर मुक्त भूमि अनुदान व प्रशासनिक योग्यता के जानकारी मिलती है।

6.नरसिंह धातु प्रतिमा अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : धातु प्रतिमा अभिलेख।

अभिलेख काल : 8वीं -10वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : शारदा।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : सराहन, रामपुर शिमला।

अभिलेख विवरण : सराहन के भीमा काली मंदिर परिसर में स्थिति भगवान नरसिंह मंदिर की प्रतिमा के आधार पीठ पर शारदा लिपि के उत्कीर्ण किये अभिलेख से मंदिर के भजीर्णोद्धार, प्रतिमा स्थापना, दान करने वालों व प्रतिमा निर्माण की संवत सहित जानकारी दी गई है।

हिमाचल : धातु अभिलेख, संदर्भ किन्नौर – डॉ. कमल के.प्यासा

Sponsored

Daily News Bulletin

Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

Related articles

लोक भवन में राज्यपाल ने सर्वोदय बाल आश्रम के बच्चों संग मनाया दीप पर्व

दीपावली का असली आनंद अपनों के साथ खुशियां बांटने में है और इस बात को सच कर दिखाया...

शिमला प्रशासन सख्त: SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के मामलों की समीक्षा

अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और मामलों की समीक्षा को लेकर शिमला जिला...

CM Sukhu Hails BBMB Verdict as a Triumph for 75 Lakh Himachalis

In a landmark verdict for Himachal Pradesh's financial rights, the Supreme Court ruled in favor of the state...

CM Sukhu Launches ‘Sukhi Parivar Yojana’ at Mehla

CM Sukhu presided over the ‘Sarkar Gaon Ke Dwaar’ initiative at Mehla, a remote village in the Bharmaur...