शिमला: हिमाचल प्रदेश के कला संसार का मूल्यांकन इस दृष्टि से होना चाहिए कि यहां रहे और यहां से निकले अमृता शेरगिल , राम कुमार, जे. स्वामीनाथन और कृष्ण खन्ना आदि कलाकारों के चित्रों की दुनिया भर में सराहना हुई। उनके चित्रों में शिमला और हिमाचल किसी न किसी रूप में रहते ही हैं। यह बात प्रख्यात कला समीक्षक-कवि-चित्रकार प्रयाग शुक्ल ने गेयटी थियेटर में अपने व्याख्यान में कही। भाषा-संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश की ओर से उनका व्याख्यान ’हिमाचल प्रदेश का कला संसार’ विषय पर आयोजित किया गया था।

प्रयाग शुक्ल ने अपने यात्रा संस्मरणों के माध्यम से रेरिक आर्ट गैलरी, नगर, सोभा सिंह आर्ट गैलरी, अन्द्रेटा और राज्य संग्रहालय, शिमला की कला संपदा, उसके महत्त्व और कला के वातावरण निर्माण में योग को लेकर भी विस्तार से बात की। उन्होंने गेयटी थियेटर के ऐतिहासिक महत्त्व के साथ रंग कर्मी अभिनेता मनोहर सिंह को याद करते हुए उनके व्यक्तित्व पर भी प्रकाश डाला।

इस व्याख्यान की अध्यक्षता शिक्षा, भाषा एवं संस्कृति विभाग के सचिव राकेश कंवर ने की। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि बड़े लेखकों, कलाकारों के ऐसे व्याख्यान स्थानीय कलाकारों, लेखकों के लिए उपयोगी सिद्ध होते हैं। इस कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार डॉ. तुलसी रमण ने प्रयाग शुक्ल के कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए किया और अंत में जिज्ञासु साहित्यकारों, कलाकारों के प्रश्नों पर आधारित संवाद भी करवाया गया।

इससे पूर्व टैवरन हॉल में प्रयाग शुक्ल के चित्रों की प्रदर्शनी का भी सचिव, भाषा-संस्कृति राकेश कंवर ने उद्घाटन किया। इस अवसर पर सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रामसुभग सिंह भी पधारे थे। विभाग के निदेशक डॉ. पंकज ललित ने अतिथि साहित्यकार प्रयाग शुक्ल तथा कार्यक्रम  के अध्यक्ष राकेश कंवर का स्वागत किया। कार्यक्रम में अनेक वरिष्ठ साहित्यकारों, कलाकारों, युवा लेखकों और कला के छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया और प्रयाग शुक्ल से अनेक सवाल करके संवाद कायम किया।

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