प्रयाग शुक्ल

कवियों, लेखकों और चित्रकारों की गर्मियों में शिमला तथा हिमाचल के अन्य हिल-स्टेशनों की यात्रा की लंबी परंपरा है। आज़ादी के पहले से रचनाकार सुकून पाने और कुछ नया रचने के लिए यहाँ आते रहे हैं। यहाँ आए लेखकों की कविताओं, कहानियों, यात्रा-संस्मरणों आदि तथा कलाकारों के चित्रों में हिमाचल की प्रकृति और संस्कृति समाती नज़र आती है।

प्रयाग शुक्ल उन रचनाकारों में से हैं जो गुज़रे अनेक दशकों से हिमाचल आते रहे हैं और यहाँ की पृष्ठभूमि के साथ रचना करते रहे हैं। उनकी अनेक कविताओं में हिमाचल के अनुभव और संदर्भ हैं। हिमाचल के कलाकारों और यहाँ की कला-परंपरा का बहुत कुछ उनके अध्ययन, लेखन और संस्मरणों में है। उनकी हिमाचल यात्रा के दृष्टिगत प्रदेश के भाषा-संस्कृति विभाग ने 16 मई को शिमला के गेयटी थिएटर में दो कार्यक्रम रखे हैं– ‘हिमाचल का कला संसार’ विषय पर कला समीक्षक प्रयाग जी का व्याख्यान और उनके चित्रों की प्रदर्शनी भी।

प्रयाग शुक्ल 84 के हो रहे हैं। उनका सारा जीवन रचनाकार का है। वरिष्ठ कवि, कहानीकार, उपन्यासकार, संस्मरणलेखक, बाल साहित्यकार  होने के साथ वह ख्याति प्राप्त कला समीक्षक और  अनुवादक हैं। लेखक के समांतर उनका व्यक्तित्व एक संपादक का रहा है। साहित्य की यादगार पत्रिका ‘कल्पना’ से शुरू करके ⁹वह ‘दिनमान’ तथा ‘नवभारत’ के संपादकीय में लंबे समय तक रहे। केंद्रीय ललित कला अकादमी की पत्रिका ‘समकालीन कला’ उन्होंने शुरू की। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की पत्रिका ‘रंग-प्रसंग’ तथा संगीत-नाटक अकादमी की पत्रिका ‘संगना’ के वह संस्थापक संपादक रहे। इस तरह वह राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, ललित कला अकादमी और संगीत नाटक अकादमी की गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं।

हिंदी तथा अंग्रेज़ी की अनेक पुस्तकों का संपादन और श्रेष्ठ पुस्तकों का बांग्ला तथा अंग्रेज़ी से इन्होंने हिन्दी में अनुवाद किया है। शिमला में उनका व्याख्यान  कलाकारों, कला समीक्षकों, कला छात्रों तथा युवा लेखकों व संपादकों के लिए लाभदायक रहेगा।

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