पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर हो गई है और मुख्यमंत्री न तो अपने मंत्रियों व विधायकों की सुन रहे हैं और न ही अधिकारी मंत्रियों की बात मान रहे हैं।
शिमला से जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर सत्ता में आई सरकार अब व्यवस्था के पतन का कारण बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली से मंत्रियों को भी सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर करनी पड़ रही है।
उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में मंत्रियों के दौरों के दौरान अधिकारियों को दूर रहने के निर्देश दिए जाते हैं, जबकि कुछ मौकों पर मंत्रियों को परियोजनाओं के उद्घाटन से भी रोका गया। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों से नेताओं का सार्वजनिक रूप से अपमान हो रहा है और इसी कारण कई कांग्रेस नेता सक्रिय राजनीति से दूरी बना रहे हैं।
जयराम ठाकुर ने मानसून के दौरान प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपदा की स्थिति में अधिकारियों की सक्रिय भूमिका जरूरी है, लेकिन यदि अधिकारी मंत्रियों के साथ ही सहयोग नहीं करेंगे तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में हुई आपदा के बाद भी कई प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। टूटी सड़कें, खराब ट्रांसफार्मर और प्रभावित पेयजल योजनाओं की बहाली अब भी अधूरी है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और उनके करीबी अधिकारियों की कार्यशैली से सत्ता पक्ष के मंत्री और विधायक भी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि विधायक छोटे-छोटे कार्यों के लिए अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा।
कांगड़ा जिला परिषद चुनाव को लेकर जयराम ठाकुर ने कहा कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों का निर्विरोध चुना जाना कांग्रेस सरकार की राजनीतिक हार है। उन्होंने कहा कि सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस इन पदों के लिए उम्मीदवार तक नहीं उतार सकी।
उन्होंने जिला परिषद कांगड़ा की नवनिर्वाचित अध्यक्ष सीमा चौधरी और उपाध्यक्ष अभिमन्यु कंवर को बधाई देते हुए उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।



