जयराम की राज भवन प्रोटेस्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया

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पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला में जारी बयान में राज भवन के बाहर हुए प्रदर्शन और प्रधानमंत्री के पुतला दहन की घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे “शर्मनाक” और “कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती” बताते हुए आरोप लगाया कि यह सब सरकार के संरक्षण में हुआ। ठाकुर ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्र में बिना अनुमति इतने लोगों का पहुंचना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूछा कि प्रदर्शन की अनुमति किसने दी, पुलिस ने रोकथाम क्यों नहीं की, और स्थानीय प्रशासन व सीआईडी इस पूरे घटनाक्रम में निष्क्रिय क्यों रहे।

जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस बिहार चुनाव नतीजों से व्यथित है और इसी राजनीतिक कुंठा का परिणाम राज भवन के सामने किया गया प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि आगजनी की सामग्री लेकर लोगों का राज भवन तक पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था की नाकामी दर्शाता है। ठाकुर का कहना है कि सरकार इस प्रकार की अराजकता के जरिए राज्यपाल पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है, जो संविधान और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने पूछा कि प्रदर्शन रोकने में असफल रहने वाले अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई और इस पूरी घटना की जवाबदेही किसकी है।

नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि उन्होंने डीजीपी से बात कर सभी आरोपितों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने में विफल रही, तो भाजपा सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराएगी। ठाकुर ने यह भी टिप्पणी की कि सरकार विरोधी नेताओं और सोशल मीडिया पोस्टों पर तो तुरंत कार्रवाई करती है, लेकिन राज भवन पर हुई इस गंभीर घटना पर प्रशासनिक चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

इसी बीच, जयराम ठाकुर ने तेजस विमान हादसे में वीरगति को प्राप्त हिमाचल प्रदेश के नगरोटा बगवां के स्क्वाड्रन लीडर नमन स्याल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नमन स्याल का बलिदान केवल हिमाचल ही नहीं, पूरे राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस कठिन समय में शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

देश में लागू की गई चारों श्रम संहिताओं पर जयराम ठाकुर ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और श्रमिक सम्मान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा संहिता के लागू होने से श्रमिकों को एकीकृत अधिकार और उद्योगों को अधिक सरल, पारदर्शी वातावरण मिलेगा। उनके अनुसार, ये सुधार भारत को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था की ओर तेज गति से आगे ले जाएंगे।

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