हिमाचल प्रदेश के महाधिवक्ता अनूप कुमार रत्न ने आज आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में 60 नवप्रवेशी अधिवक्ताओं को शपथ दिलाई और उन्हें प्रैक्टिस सर्टिफिकेट सौंपे। कार्यक्रम में न्यायिक गरिमा और संविधान के प्रति निष्ठा का माहौल देखने को मिला, जहां नए अधिवक्ताओं ने विधि व्यवसाय में ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने का संकल्प लिया।
अपने संबोधन में महाधिवक्ता ने कहा कि अधिवक्ता केवल कानून के जानकार नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की रीढ़ और समाज में न्याय की आवाज होते हैं। उन्होंने नव अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे अपने पेशे में सत्य, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि एक सच्चा अधिवक्ता वही है जो कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के अधिकारों की रक्षा करते हुए समाज में न्याय की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभाए। वकालत को केवल रोजगार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार सामाजिक सेवा बताते हुए उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं का आचरण न्यायपालिका की गरिमा को मजबूत करता है।
महाधिवक्ता ने युवाओं को बदलते समय के साथ कदम मिलाने की सलाह देते हुए कहा कि आधुनिक कानून व्यवस्था और तकनीकी बदलावों की निरंतर जानकारी आवश्यक है, ताकि वे अपने पेशे में अधिक प्रभावी बन सकें।
कार्यक्रम के दौरान माहौल उत्साहपूर्ण रहा और नव अधिवक्ताओं ने न्याय के मार्ग पर ईमानदारी और निष्ठा के साथ आगे बढ़ने की शपथ ली। इस अवसर पर बार एसोसिएशन के नव निर्वाचित सदस्य, वरिष्ठ अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।



