ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने शुक्रवार को मेहली में 1 करोड़ 14 लाख रुपये की लागत से बने नए अत्याधुनिक पंचायत सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मेहली में हर्बल गार्डन का उद्घाटन किया और घोरपा से शिलडी सड़क का शिलान्यास भी किया। जनसभा को संबोधित करते हुए पंचायती राज मंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास और अर्थव्यवस्था की वास्तविक नींव पंचायत घर ही होते हैं, इसलिए पंचायतों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करना राज्य सरकार की मुख्य प्राथमिकता है। उन्होंने जानकारी दी कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला और एकमात्र ऐसा राज्य है, जहाँ सभी नए पंचायत भवनों का डिज़ाइन एक समान रखा गया है। नए भवन में सम्मेलन कक्ष, पुस्तकालय, प्रधान व सचिव कार्यालय, ग्राम रोजगार सेवक कक्ष, रसोईघर और शौचालय जैसी सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध करवाई गई हैं।मेहली क्षेत्र के चौमुखी विकास का उल्लेख करते हुए कैबिनेट मंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों के दौरान इस पंचायत में लगभग 50 लाख रुपये विकास कार्यों पर व्यय किए गए हैं। उन्होंने घोषणा की कि क्षेत्र में जल्द ही बहुउद्देशीय पार्किंग और कम्युनिटी हॉल का निर्माण किया जाएगा, जिसका एस्टीमेट तैयार हो रहा है। इसके साथ ही एक बड़े खेल मैदान के लिए ज़मीन चिह्नित कर ली गई है, जिसे शीघ्र विकसित किया जाएगा। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने नशे से दूर रहने, खेलों को अपनाने और सरकार की स्वरोजगार योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया। शिक्षा क्षेत्र में सुधारों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश के 150 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध किया गया है ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। उन्होंने मेहली स्कूल के निर्माणाधीन भवन में 4 नए शौचालय बनाने और सांस्कृतिक व खेल गतिविधियों के लिए 50 हजार रुपये देने का भी ऐलान किया।
कार्यक्रम के दौरान राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मेहली में हर्बल गार्डन का उद्घाटन किया गया, जिससे विद्यार्थियों को औषधीय पौधों और उनके स्वास्थ्य लाभों के बारे में व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होगा। इस मौके पर एपीएमसी किन्नौर एवं शिमला के अध्यक्ष देवानंद वर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार ‘आत्मनिर्भर हिमाचल’ के संकल्प के साथ बिना किसी समझौते के विकास कार्यों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों को स्तरोन्नत कर जमा दो स्तर तक पहुँचाने से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को अपने घर के समीप बेहतर शिक्षा के अवसर मिल रहे हैं।


