दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने के कुछ समय बाद ही हटा दी गई, जिसके बाद पंजाब में इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फिल्म मूल रूप से ‘पंजाब 95’ नाम से बनाई गई थी और 2022 में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया गया था। बताया जाता है कि बोर्ड द्वारा सुझाए गए 127 संशोधनों पर सहमति नहीं बनने के कारण फिल्म रिलीज नहीं हो सकी। बाद में इसे नए नाम ‘सतलुज’ से ओटीटी पर जारी किया गया। सरकारी सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद प्लेटफॉर्म से फिल्म हटाने को कहा गया।
फिल्म स्वयंभू मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों के मुद्दे पर आधारित बताई जाती है। फिल्म के आलोचकों का आरोप है कि इसमें पंजाब पुलिस और सुरक्षा बलों की भूमिका को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले पुलिसकर्मियों के योगदान पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।
दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों और फिल्म से जुड़े पक्षों का कहना रहा है कि यह फिल्म पंजाब के एक संवेदनशील दौर की घटनाओं को एक अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास है।
फिल्म को लेकर छिड़ी बहस ने एक बार फिर पंजाब में आतंकवाद, मानवाधिकार और सुरक्षा बलों की भूमिका जैसे मुद्दों को सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है। वर्तमान में फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं है।



