एससी/एसटी अधिकारों की सुरक्षा पर प्रशासन सख्त

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उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में गुरुवार को बचत भवन में जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत दर्ज मामलों, राहत एवं पुनर्वास सहायता तथा जागरूकता गतिविधियों की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित किया जाए और अत्याचार से जुड़े मामलों का त्वरित निपटारा किया जाए। उन्होंने कहा कि यह कानून समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। बैठक में बताया गया कि जिला में वर्ष 2018 से मई 2026 तक ऐसे 48 मामले लंबित हैं। साथ ही पंचायत प्रतिनिधियों के लिए आयोजित होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रमों में इस अधिनियम से संबंधित जानकारी भी शामिल की जाएगी, ताकि वे लोगों को जागरूक कर सकें और पीड़ितों को न्याय दिलाने में सहयोग कर सकें।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि अधिनियम के तहत पीड़ितों को विभिन्न मामलों में 85 हजार रुपये से लेकर 8.25 लाख रुपये तक राहत राशि प्रदान करने का प्रावधान है। जिला शिमला की कुल आबादी में अनुसूचित जाति समुदाय की हिस्सेदारी 26.51 प्रतिशत है।

इसी दौरान राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 के तहत स्थानीय स्तरीय समिति की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें सात नए दिव्यांगजनों को कानूनी संरक्षक प्रदान करने की मंजूरी दी गई। उपायुक्त ने बताया कि यह व्यवस्था ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, बौद्धिक दिव्यांगता और बहु-विकलांगता से ग्रस्त व्यक्तियों के अधिकारों और हितों की सुरक्षा के लिए की गई है। उन्होंने कहा कि जिला में अब तक 108 दिव्यांगजनों के लिए कानूनी संरक्षक नियुक्त किए जा चुके हैं। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संरक्षक नियुक्ति से जुड़े मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाए ताकि दिव्यांग व्यक्तियों के हितों और गरिमा की रक्षा हो सके।

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