जिला प्रशासन शिमला द्वारा सनराइज पैराडाइज पब्लिक स्कूल, संजौली के सुचारू संचालन और विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियुक्त प्रशासक एवं अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (प्रोटोकॉल) ज्योति राणा ने शुक्रवार को विद्यालय का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल की शैक्षणिक व प्रशासनिक व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की तथा विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रबंधन से विभिन्न पहलुओं पर जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण के दौरान ज्योति राणा ने कक्षाओं का दौरा कर विद्यार्थियों से सीधे संवाद स्थापित किया। उन्होंने बच्चों से पढ़ाई की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपलब्धता और स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में फीडबैक लिया। विद्यार्थियों ने भी अपनी बात और सुझाव उनके समक्ष रखे, जिन्हें उन्होंने गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जिला प्रशासन उनके शैक्षणिक भविष्य को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी स्थिति में उनके हितों से समझौता नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि विद्यालय में नियमित कक्षाएं संचालित होंगी और सभी शैक्षणिक गतिविधियां व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ेंगी। साथ ही विद्यार्थियों से मन लगाकर और अनुशासन के साथ अध्ययन करने का आह्वान किया।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय की आधारभूत सुविधाओं, कक्षाओं की स्थिति, स्वच्छता व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधों एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का भी मूल्यांकन किया गया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समयबद्ध रूप से पूरी की जाएं तथा विद्यालय का वातावरण सुरक्षित, अनुशासित और शिक्षण के अनुकूल बनाया जाए।
ज्योति राणा ने कहा कि प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक विद्यार्थी को बिना किसी बाधा के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों की पढ़ाई पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और समय-समय पर निरीक्षण जारी रहेंगे।
उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करें और किसी भी समस्या या सुझाव को प्रशासन अथवा विद्यालय प्रबंधन के साथ साझा करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन, विद्यालय प्रबंधन, शिक्षक और अभिभावकों के संयुक्त प्रयासों से विद्यालय में शैक्षणिक वातावरण और अधिक सुदृढ़ होगा तथा विद्यार्थियों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।



