शिमला में प्रवासी मजदूरों का पंजीकरण अनिवार्य

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जिला शिमला में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना की रोकथाम के लिए जिला दंडाधिकारी अनुपम कश्यप ने अस्थायी रूप से रह रहे प्रवासी मजदूरों, रेहड़ी-फड़ी व फेरी वालों तथा अन्य बाहरी कामगारों के पंजीकरण को अनिवार्य कर दिया है।

जारी आदेशों के अनुसार कोई भी नियोक्ता, ठेकेदार या व्यापारी तब तक किसी प्रवासी श्रमिक को कार्य पर नहीं रख सकेगा, जब तक संबंधित मजदूर पासपोर्ट साइज फोटो सहित अपना पूरा विवरण नजदीकी पुलिस थाने में एसएचओ के समक्ष दर्ज नहीं करवाता। इसी तरह जिला में आने वाला कोई भी बाहरी व्यक्ति बिना थाना प्रभारी को सूचना दिए स्वरोजगार, गैर-औपचारिक व्यापार या रोजगार की तलाश में संलिप्त नहीं हो सकेगा।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत उद्यमियों, कारोबारियों, ठेकेदारों, किसानों और मकान मालिकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बाहरी कामगारों का फोटो सहित विवरण देकर नजदीकी पुलिस थाने में पंजीकरण सुनिश्चित करें। इसके साथ ही प्रवासी श्रमिकों का एंटीसिडेंट वेरिफिकेशन (पूर्व रिकॉर्ड की जांच) भी अनिवार्य किया गया है।

जिला दंडाधिकारी ने स्पष्ट किया कि बिना पंजीकरण कोई भी प्रवासी व्यक्ति जिला शिमला में रोजगार नहीं कर सकेगा। आदेशों का उल्लंघन करने पर बाहरी कामगारों, उनके नियोक्ताओं और मकान मालिकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ये आदेश 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेंगे।

जिला दंडाधिकारी अनुपम कश्यप ने पंजाब राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1953 की धारा 6 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए शिमला शहर के 10 चिन्हित स्थानों पर सार्वजनिक बैठकें, जुलूस, रैलियां, धरना-प्रदर्शन, नारेबाजी, बैंड बजाने तथा हथियार के रूप में इस्तेमाल की जा सकने वाली वस्तुएं ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

यह प्रतिबंध छोटा शिमला, रिज, स्कैंडल पॉइंट, लोअर बाजार, कार्ट रोड, चौड़ा मैदान सहित विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में लागू रहेगा। हालांकि यह आदेश अपने कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान पुलिस, अर्धसैनिक और सैन्य बलों पर लागू नहीं होगा।

सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की तात्कालिक आवश्यकता को देखते हुए यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किए गए हैं और 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेंगे। प्रतिबंधित क्षेत्रों में किसी भी कार्यक्रम के लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। आदेशों का उल्लंघन करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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