January 9, 2026

Tag: कविता

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संस्कृति, कला और शब्दों का संगम : ‘विपाशा’

भाषा एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रकाशित द्विमासिक साहित्यिक पत्रिका ‘विपाशा’ वर्ष 1985 से निरंतर प्रकाशित हो रही है। विगत चार दशकों में...

जड़ों का दर्द – रणजोध सिंह

महकते हुए हसीं गुल ने अपनी जड़ों से पूछातुम्हारा वजूद क्या है?जवां बेटे ने अपने बुड़े बाप से पूछाआपने मेरे लिए किया क्या है|? दरिया...

कुचल दिया भरोसा ले गया विश्वास निकाल – रवींद्र कुमार शर्मा

सुना था शहर में मिलता है फसल का अच्छा दामयही सोच कर निकल पड़ा गांव से एक किसानदो घंटे की उतराई सिर पर बेचने...

आज़ादी की पहली सुबह

डॉ. जय महलवाल बहुत याद आती है वो आज़ादी की पहली सुबह,15 अगस्त 1947 को था जब भारत में तिरंगा फहराया।हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई...

पुस्तक मेले में बाल साहित्य की भरमार 

शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर सजे पुस्तक मेले में विभिन्न प्रकाशकों द्वारा प्रदर्शित पुस्तकों में बाल साहित्य की भरमार है। इन पुस्तकों में कविता,...

उल्कापात कमांए: एक कविता

डॉ. जय महलवाल (अनजान) बड्डिया मेहनता ने डाल बूटे लगाए, फेरी किस मांहनूए रिए सोचे से जलाए, मारी ते जले पंछी पेखेरू, तिना रे  जे...

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