January 14, 2026

Tag: कवितासंग्रह

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रात रोई है: डॉo कमल केo प्यासा

रातरात रोई हैरात भर ! कुछ सहमी सहमी,डरी डरी,कुछ ठंडी ठंडी औरकुछ भीगी भीगी सी,साक्षी भौंर पुकार उठी ! बूंद बूंद ये मोती,कलियों पे हरियाली पेफूलों...

सोच: डॉo कमल केo प्यासा

प्रेषक : डॉ. कमल के . प्यासा खेलताकोई आग मेंचिलचिलाती धूप औरबरसते पानी की बरसात में मिट्टी धूल सेतो कहीं गंदगी कचरेकूड़े कबाड़ केढेर से बैठा...

भावनाओं का सफर — कविताएँ

डॉ कमल के प्यासा हिलोरे जीवन चक्र केझूले में,झूल हर कोई हिलोरे लेता है।कोई कमकोई अधिक,बस अपने कर्मों काफल वसूल लेता है ! रिश्ते रिश्तों के जंगल...

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