March 27, 2026

Tag: मानवमूल्य

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ग़ज़ल: मानवता पर डॉo कमल केo प्यासा के विचार

आदमी को आदमी ही खाने लगा है ?लहू अपना ही खुद शर्माने लगा है !महज़ के नाम पर उठती हैं लाठियां !ईमान इतना डगमगाने...

 वे लोग — कविता

लेफ्टिनेंट डॉक्टर जय महलवाल हम तो अपनी मस्ती में रंगे रह जाते हैं,बातों ही बातों में परायों को भी अपना बना जाते हैं,जो दूसरों पर...

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