वे लोग — कविता

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 वे लोग : लेफ्टिनेंट डॉक्टर जय महलवाल

लेफ्टिनेंट डॉक्टर जय महलवाल

हम तो अपनी मस्ती में रंगे रह जाते हैं,
बातों ही बातों में परायों को भी अपना बना जाते हैं,
जो दूसरों पर लांछन लगाते हैं,
वे घटिया मानसिकता के लोग कहलाते हैं ।

वो खुद के गिरेबान में तो कभी झांक नहीं पाते हैं,
दूसरों के काम में जरूर मीन–मेख निकालते रहते हैं,
अगर कोई अपनी मेहनत से भी आगे बढ़ रहे होते हैं,
वे उनकी मेहनत पर भी पानी फेरने की फितरत में हमेशा रहते हैं।
खुद को तो आते नहीं दो शब्द भी बोलने के महफिल में,
वे शख्स उसी महफिल में दूसरों की गलतियां निकालने में लगे रहते हैं।

खुद लगे रहते चमचागिरी करने में किन्ही खास खास की,
वे जान बूझ कर मेहनत करने वालों को महफिलों में नहीं बुलाते हैं,
खुद तो अपने गिरेबान में झांकते नहीं कभी,
वे दूसरों की गलतियां निकालने में व्यस्त रहते हैं।

जब कहा जाए उनको कुछ कहने को,
तो ये तो हमसे बड़े हैं यह बात कहके बड़ी आसानी से बात टाल जाते हैं,
हकीकत आज की यह है दोस्तो,
वे लोग सच में ही घटिया मानसिकता वाले लोग कहलाते हैं।

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Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

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