भीम सिंह, गांव देहरा, डाकखाना हटवाड़, उप-तहसील भराड़ी, जिला बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश 

मुनि राम आज जैसे ही काम पर से घर लौटा बैसे ही उसकी धर्मपत्नी कमू देवी उसके पास आकर बैठ गई और मुनि राम से बतियाने लग गई । वह नजरें झुकाकर मुनि राम से कहने लगी कि आजकल जमाना बहुत खराब है । आजकल ये मोबाइल फोन क्या बच्चों के हाथ में आ गये हैं कि सारा दिन इन में ही खोये रहते हैं और पता नहीं किस किस से बातें करते रहते हैं । इसमें क्या -क्या देखते रहते हैं । बच्चे कच्ची अक्ल के होते हैं । इन्हें दुनियादारी की इतनी समझ नहीं होती है । इनके कोमल दिल दिमाग पर हर बात का प्रभाव पड़ता है वह चाहे सही हो या गलत।

कमू देवी की ये बातें सुनकर मुनि राम पूछने लगा कि आज आप ऐसी बातें क्यों कर रही हो। सही-सही बताओ आखिर बात क्या है? आप के मन में किस बात की शंका है ?

शंका तो मुझे खास किसी बात की नहीं है । मैं तो जमाने के हालात देखकर मन ही मन बहुत डरती हूं। आज अखबारों में, टेलीविजन पर क्या नहीं देखने, सुनने को मिल रहा है । हम गरीब लोग हैं। कहीं कोई उच्च-नीच हमारे साथ या हमारे बच्चों के साथ हो जाये तो हम तो जीते जी मर जायेंगे । हमारे घर में भी हमारी बेटी जवान हो गई है। मैं चाहती हूं कि हमें इसकी शादी कर देनी चाहिए ।

अच्छा तो आपके मन में आजकल ये सब चल रहा है । मैं भी कहूं कि आजकल आप चुप-चुप क्यों रहती हो ।कमू सुनो , जमाने में सब लोग ही गन्दें विचारों के नहीं होते। यदि आदमी सम्भल कर और देखभाल कर कदम रखे तो ठोकर नहीं लगती। दूसरे हमें अपने बच्चों को सही शिक्षा और अच्छे संस्कार देने चाहिए। फिर जमाना कुछ नहीं कर सकता। बाकि बात रही बेटी की शादी की तो अभी मैं इसे पढ़ाऊंगा और फिर अच्छी ट्रेनिंग करवा कर किसी अच्छे जॉब पर लगने दूंगा । तब फिर कहीं इसकी शादी के वारे में सोचूंगा । क्योंकि जमाना हमेशा कमजोर पर बार करता है और शक्ति शाली से भय खाता है। मैं अपने बच्चों को कमजोर नहीं रहने दूँगा। इसलिए अपने अंदर के हर उस विचार को निकाल दो, जो भय पैदा करता हो। यदि हम ठीक होंगे तो हमारे बच्चे भी कुदरती ठीक होंगे । इतना कहकर मुनि राम उठा और घर के किसी काम में लग गया।


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