हिमाचल प्रदेश में शिक्षा प्रणाली को और अधिक समकालीन व प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने निरंतर एवं समग्र मूल्यांकन (CCE) आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल के अंतर्गत प्रदेश के 33,000 से अधिक सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, ताकि पारंपरिक रटंत प्रणाली की जगह पर अब अवधारणात्मक समझ, आलोचनात्मक सोच और व्यवहारिक अधिगम को बढ़ावा दिया जा सके।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप है और समग्र शिक्षा योजना के तहत लागू किया जा रहा है। शिक्षा निदेशालय ने इस प्रशिक्षण को लक्षित अध्यापकों के लिए अनिवार्य कर दिया है, जिससे वे नई मूल्यांकन प्रणाली को आत्मसात कर सकें। इसका उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को केवल अंकों की गणना तक सीमित न रखते हुए उसे सीखने की गुणवत्ता में सुधार लाने का एक सशक्त उपकरण बनाना है।
इस प्रशिक्षण को तीन प्रमुख स्तरों पर लागू किया जा रहा है। जिला स्तर पर दो दिवसीय कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें मास्टर ट्रेनर अध्यापकों को छोटे समूहों में प्रशिक्षित कर रहे हैं। कार्यशालाओं में प्रश्नपत्र निर्माण, अधिगम परिणामों के आधार पर प्रश्नों का चयन, विषयवार ब्लूप्रिंट बनाना और उत्तर पुस्तिकाओं का विश्लेषण कर सुधारात्मक कार्य योजना तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
डिजिटल माध्यम से भी अध्यापकों को सशक्त बनाया जा रहा है। स्विफ्टचैट प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन मॉड्यूल उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सहयोग से तैयार किया गया है। इन मॉड्यूल को सफलतापूर्वक पूरा करने पर अध्यापकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रमाणन भी प्रदान किया जाएगा। साथ ही, शिक्षक मंच के माध्यम से वे अपने अनुभव साझा कर सकेंगे और जिला स्तर पर संवाद-सहयोग का माहौल तैयार होगा।
शिमला जिले में यह प्रशिक्षण फ्लोरेंस विला बनूटी में चल रहा है, जिसमें कसुम्पटी, मशोबरा और सुन्नी शिक्षा खंडों से शिक्षक भाग ले रहे हैं। इस प्रशिक्षण सत्र का संचालन श्वेता चौहान द्वारा किया जा रहा है।
यह एकीकृत प्रशिक्षण मॉडल न केवल हिमाचल के शिक्षकों को नई शिक्षण तकनीकों से लैस कर रहा है, बल्कि राज्य में निरंतर एवं समग्र मूल्यांकन पद्धति को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।



