कल्याण अधिकारी खुद हुए उपेक्षा का शिकार

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हिमाचल प्रदेश तहसील कल्याण अधिकारी संघ ने राज्य सरकार द्वारा तहसील कल्याण अधिकारियों (TWO) के पदों को सहायक तहसील कल्याण अधिकारी में डाउनग्रेड किए जाने के निर्णय की कड़ी निंदा की है। संघ ने इस कदम को अधिकारियों के मनोबल को तोड़ने वाला, अन्यायपूर्ण और असंवेदनशील बताया है।

संघ के अनुसार, तहसील कल्याण अधिकारी न केवल तहसील स्तर पर कार्यालयाध्यक्ष (Head of Office) के रूप में कार्य करते हैं, बल्कि वे प्रोबेशन ऑफेंडर्स एक्ट के तहत प्रोबेशन अधिकारी का दायित्व भी निभाते हैं। इसके अतिरिक्त, वे सामाजिक सुरक्षा पेंशन, स्वर्ण जयंती आश्रय योजना, इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना, वाल्मीकि कामगार आवास योजना, दिव्यांग छात्रवृत्ति योजना, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना जैसी कई राज्य व केंद्र प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन में भी अहम भूमिका निभाते हैं। साथ ही, वे अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, माता-पिता भरण-पोषण अधिनियम और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण कानूनों को भी लागू करने का कार्य करते हैं।

संघ का कहना है कि एक-एक तहसील कल्याण अधिकारी प्रतिमाह औसतन 5,000 से 10,000 लाभार्थियों के सत्यापन, फील्ड निरीक्षण और लाभ हस्तांतरण की जिम्मेदारी अकेले निभा रहा है। वर्तमान में राज्य के 71 तहसील कल्याण अधिकारी लगभग 18 लाख लाभार्थियों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं, जिनमें उन्हें प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ योजनाओं का समुचित क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करना होता है।

इसके बावजूद, अधिकांश तहसील कल्याण कार्यालयों में किसी प्रकार का सहायक स्टाफ उपलब्ध नहीं है। अधिकारी को न केवल कार्यालयीय कार्य बल्कि मैदानी निरीक्षण भी स्वयं करना पड़ता है, और कई बार एक से अधिक तहसीलों का अतिरिक्त कार्यभार भी उठाना पड़ता है। वहीं, अन्य विभागाध्यक्षों को आवश्यक संसाधन और पर्याप्त स्टाफ प्रदान किया गया है, जिससे कार्य करना उनके लिए अपेक्षाकृत सहज होता है।

संघ का मानना है कि सरकार को तहसील कल्याण कार्यालयों को सुदृढ़ कर “कल्याणकारी राज्य” की संविधानिक अवधारणा को साकार करना चाहिए था। लेकिन इसके विपरीत, तहसील कल्याण अधिकारियों के पद को घटाना यह दर्शाता है कि सरकार समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा में लगे अधिकारियों के योगदान को नज़रअंदाज कर रही है। यह न केवल अधिकारियों के प्रति अन्याय है, बल्कि वंचित वर्गों के हितों पर भी सीधा प्रभाव डालता है।

संघ के पदाधिकारियों – अध्यक्ष सुरेंद्र बीमटा, महासचिव नीतीश वी, और मीडिया प्रभारी सतीश शर्मा ने इस संबंध में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव आशीष सिंहमार से मुलाकात कर एक मांगपत्र सौंपा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि इस अन्यायपूर्ण निर्णय को तुरंत रद्द किया जाए, तहसील कल्याण कार्यालयों में आवश्यक स्टाफ की नियुक्ति की जाए, और तहसील कल्याण अधिकारियों को तहसील स्तर के अन्य विभागाध्यक्षों के समकक्ष दर्जा प्रदान किया जाए।

विक्रमादित्य सिंह ने ओगली में जनसमस्याएं सुनीं

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