गीता यहां, कुरान यहां
बाइबल और ग्रंथ साहिब भी
साथ-साथ यहाँ रहते हैं|
बेशक भिन्न वेश-भूषायें हैं,
बोलियां भी अपनी भिन्न है
फिर भी हर सुख-दुःख,
हम मिलजुल कर सहते हैं|
यूं ही नहीं !
मेरे देश को प्रेम की धरती कहते हैं|
सर्दी यहाँ, गर्मी यहाँ
बसंत यहाँ, शरद यहाँ
कभी रिमझिम मेघ बरसते हैं|
सागर यहाँ, पर्वत यहाँ
नदियाँ यहाँ, झरने यहाँ
लहके-दहके खेत, हर मौसम सोना उगलते हैं|
यूं ही नहीं !
मेरे देश को सोने की चिड़िया कहते हैं|
क्या चीन, क्या जापान
क्या इटली, क्या अमेरिका
सब भारत में सेध लगाते हैं|
योग यहाँ, अध्यात्म यहाँ
समस्त विश्व में भारतवासी
सबको गले लगाते हैं|
यूं ही नहीं !
मेरे देश को विश्व गुरु कहते हैं|
आक्रमण मेरे देश का
दस्तूर नहीं हरगिज
दुश्मन का हर नखरा
बड़े शोक से सहते हैं|
पर जब कोई अमन-शान्ति को,
कायरता समझने लगते हैं
जब ज़ेर-ओ-ज़बर के पानी,
सर से गुजरने लगते हैं|
फिर प्राणों की चिंता हम नहीं करते
दुश्मन से दुश्मन की भाषा में बातें करते हैं|
यूं ही नहीं !
मेरे देश को वीरों की धरती कहते हैं|



