हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एचपीएसडीएमए) के उपाध्यक्ष दीपक राठौर ने कहा कि आपदा के दौरान प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की रक्षा प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि समय पर प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और पूर्व तैयारी से आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
बचत भवन में आयोजित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की मानसून तैयारियों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए राठौर ने जिला प्रशासन की तैयारियों की सराहना की। उन्होंने प्रत्येक पंचायत में कम से कम पांच लोगों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए ताकि राहत एवं बचाव कार्य स्थानीय स्तर पर प्रभावी ढंग से संचालित हो सकें।
उन्होंने बताया कि एचपीएसडीएमए एक मोबाइल ऐप विकसित कर रहा है, जिसके माध्यम से आपदा की सूचना और सटीक लोकेशन कुछ ही सेकंड में राज्य व जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र तक पहुंच सकेगी। ऐप जल्द लॉन्च किया जाएगा।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य “आपदा सहनशील शिमला” का निर्माण है। इसके लिए राहत, बचाव और आवश्यक सेवाओं की शीघ्र बहाली पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बैठक में बताया गया कि 219 पंचायतों को पंचायत इमरजेंसी रिस्पांस योजना में शामिल किया गया है, 200 सुरक्षित आश्रय स्थल चिन्हित किए गए हैं और 550 ‘आपदा मित्र’ स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
1 से 24 जुलाई 2026 के बीच जिले में प्रभावित 99 सड़कों में से 86, 136 ट्रांसफार्मरों में से 126 तथा 62 पेयजल योजनाओं में से 42 को बहाल किया जा चुका है। इस अवधि में प्राकृतिक आपदाओं में 16 लोगों की मृत्यु हुई, जबकि प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग 52.80 लाख रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। प्रभावित परिवारों को राहत और पुनर्वास सहायता प्राथमिकता के आधार पर दी जा रही है।



