ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से दिव्ययोग रिसर्च फाउंडेशन ट्रस्ट की इकाई आयुष हॉस्पिटल, न्यू टूटू ने रविवार को घणाहट्टी में निःशुल्क आयुष स्वास्थ्य एवं रोग जांच शिविर आयोजित किया। शिविर का शुभारंभ घणाहट्टी पंचायत के प्रधान रोशन लाल ठाकुर ने किया। उनके सहयोग से आयोजित इस शिविर में 51 लोगों ने स्वास्थ्य जांच, विशेषज्ञ परामर्श और आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठाया।
शिविर में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थायरॉइड, अस्थमा, मोटापा, गठिया, कमर और गर्दन दर्द, पाचन संबंधी समस्याएं, चिंता, अवसाद, महिलाओं और बुजुर्गों से जुड़ी सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं की जांच की गई। विशेषज्ञों ने बदलती जीवनशैली, तनाव और अनियमित खान-पान को कई बीमारियों का प्रमुख कारण बताते हुए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच और संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी।
मरीजों का ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन, बीएमआई, आंखों और दांतों की जांच सहित सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण निःशुल्क किया गया। साथ ही आयुर्वेद, योग, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के महत्व पर भी जानकारी दी गई। शिविर के दौरान आयुष हॉस्पिटल की ओपीडी, आईपीडी, पंचकर्म, योग चिकित्सा, प्राकृतिक चिकित्सा, पैथोलॉजी लैब, ईसीजी और अन्य सुविधाओं की जानकारी भी साझा की गई।
अस्पताल ने 70 से अधिक जांचों वाले विशेष ब्लड टेस्ट हेल्थ पैकेज को, जिसकी सामान्य कीमत लगभग ₹2500 है, शिविर में ₹599 की रियायती दर पर उपलब्ध कराया। इस सुविधा का भी बड़ी संख्या में लोगों ने लाभ उठाया।
शिविर में वरिष्ठ आयुर्वेद एवं पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. के.के. शर्मा ने मरीजों की जांच कर व्यक्तिगत स्वास्थ्य परामर्श दिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों का उपचार नहीं बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रदान करने पर भी बल देता है।
घणाहट्टी पंचायत के प्रधान रोशन लाल ठाकुर ने इस पहल की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि ऐसे शिविर हर महीने आयोजित किए जाएं, ताकि ग्रामीणों को नियमित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। इस पर दिव्ययोग रिसर्च फाउंडेशन ट्रस्ट एवं आयुष हॉस्पिटल के संस्थापक एवं अध्यक्ष विजय कुमार सूद ने घोषणा की कि अगस्त 2026 से प्रत्येक माह के पहले रविवार को निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य केवल उपचार नहीं, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवन के प्रति जागरूक बनाना भी है। भविष्य में प्रदेश के अन्य ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में भी ऐसे शिविर आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम के अंत में अस्पताल प्रबंधन ने पंचायत प्रतिनिधियों, चिकित्सकों, स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।



