अँधेरा है कुछ पहर — कोमल

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कोमल, बीएससी मेडिकल, 1st ईयर, बैजनाथ गवर्नमेंट कॉलेज

अँधेरा है कुछ पहर
चलना है अभी रास्तों पर
जल कर चमकना है
सूरज जैसा बनना है…….
अंधेरों में भी अब
चाँद जैसा तुझे दिखना है
खुद की तालाश कर
इस सफर में आगे बढ़ना है
कभी नहीं अब रुकना है
कमज़ोर हो जाये उन इरादों को नहीं रखना है….
मुश्किलें चाहें जितनी हो
तुझे तोह बस अब चलना है……
समय जैसा बनना है
बस अब आगे बढ़ना है ….

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