बाबा साहब अंबेडकर जयंती: अंबेडकर जी की शिक्षा और समाज सुधार की कहानी

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ईकाई अध्यक्ष गौरव कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा की आज‌ समाज सुधारक, संविधान निर्माता, भारत रत्न डा भीमराव अम्बेडकर की जयंती के उपलक्ष्य पर चौड़ा मैदान में अंबेडकर जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर ने बाल्य काल से ही भेदभाव, घृणा व अपमान सहन किया। लेकिन वो पहले भारतीय थे जिन्होंने विदेश में जाकर अर्थशास्त्र में पीएचडी की शिक्षा प्राप्त की । बाबा साहब अंबेडकर हमेशा कहते थे कि जब भी मेरे व्यक्तिगत हित व देश हित में टकराव होगा तो मैं हमेशा देश हित को प्राथमिकता दूंगा।

गौरव कुमार ने बताया की बाबा साहब अंबेडकर जी ने अपने जीवन में बहुत सी मुश्किलों का सामना करते हुए भी शिक्षा प्राप्त करी और उस समय जब देश की स्थिति रुढ़ीवादी धारणाओं से समाज बंटा हुआ था। उस समय में अंबेडकर जी ने अपनी कुशाग्र बुद्धि के बल पर विदेश में जा कर के भारत का परचम लहराया था। क्योंकि उनका अटल संकल्प था की भारत में वर्ग व्यवस्था और छुआछूत को दूर करना है। क्योंकि वह बचपन से उन मुश्किलों का सामना करते आ रहे थे।

उन्होंने कहा की जिस कारण से देश गुलामी की जंजीरों ने जकड़ा था, वे असमानता था इसी बात को मध्य नजर रखते हुए बीआर अंबेडकर जी ने हमारे संविधान में नागरिकों को पहला अधिकार समानता का अधिकार अनुच्छेद 14 में दिया गया है। बाबा साहेब आंबेडकर जी हम सभी में समरसता का भाव उत्पन करने का काम करते हैं, हमे उनकी जीवनी और उनकी लिखी किताबों को पढ़ कर उनका अनुसरण करना अति आवश्यक है।

बाबा साहब अंबेडकर जयंती: अंबेडकर जी की शिक्षा और समाज सुधार की कहानी

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