हिन्दी को अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए नई शिक्षा नीति

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शिक्षा के क्षेत्र में हिन्दी को अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए नई शिक्षा नीति के तहत अनुकरणीय पहल की गई है। यह विचार आज जिला लोक सम्पर्क अधिकारी संजय सूद ने जिला भाषा अधिकारी कार्यालय द्वारा ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में हिन्दी पखवाड़े के तहत आयोजित जिला स्तरीय अंतरविद्यालयीय हिन्दी भाषण, निबंध लेखन एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के उद्घाटन अवसर पर यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हिन्दी राष्ट्र में सर्वजन द्वारा समझी जाने वाली भाषा है। हिन्दी को व्यापक रूप से प्रभावी भाषा बनाने के लिए सरकार के द्वारा किए जा रहे कार्यों के साथ-साथ व्यक्तिगत प्रयास भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि हम निश्चय कर दैनिक वार्तालाप को हिन्दी के माध्यम से करें तो अवश्य ही भाषा के उत्थान को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि भाषा विभाग द्वारा हिन्दी भाषा के संरक्षण व संवर्धन के लिए अनेक कार्यक्रम व गतिविधियां आयोजित की जाती है, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों, लेखकों, कलाकारों को सम्मिलित किया जाता है।

समय-समय पर विभाग द्वारा संगोष्ठियों, चर्चाओं व प्रतियोगिताओं के आयोजन से स्थानीय भाषा के साथ-साथ हिन्दी भाषा व साहित्य को विशेष अधिमान दिया जा रहा है। इस अवसर पर जिला भाषा अधिकारी अनिल हारटा ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्यक्रम में शिमला नगर के विभिन्न स्कूलों के लगभग 80 छात्र-छात्राएं भाग ले रहे हैं, जिसमें प्रश्नोत्तरी में हिन्दी साहित्य व हिन्दी सामान्य ज्ञान, भाषण प्रतियोगिता के तहत आजादी का अमृत महोत्सव और हिन्दी विषय को शामिल किया गया है। निबंध लेखन के लिए राष्ट्र निर्माण में राष्ट्रभाषा की भूमिका विषय रहेगा। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार गुप्तेश्वर नाथ उपाध्याय, चर्चित कथाकार आत्म रंजन तथा सहायक लोक सम्पर्क अधिकारी नितिश पोज्टा निर्णायक मण्डल के रूप में शामिल हुए।

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