नारकण्डा में पर्यावरण संरक्षण एवं जन-जागरूकता अभियान के तहत पौधारोपण कार्यक्रम के बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, किन्नौर स्थित रामपुर बुशहर के सौजन्य से विकास खंड अधिकारी कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों, महिला मंडल, युवक मंडल सदस्यों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (एसीजेएम) अजय ठाकुर ने की। उन्होंने कहा कि कानून की जानकारी प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों से परिचित होना हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पात्र लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाई जाती है, ताकि आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय पाने से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि महिलाएं, बच्चे, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोग, दिव्यांगजन, प्राकृतिक आपदा से प्रभावित व्यक्ति और निर्धारित आय सीमा के अंतर्गत आने वाले नागरिक इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
अजय ठाकुर ने कहा कि पात्र लोगों को न्यायालय में अधिवक्ता उपलब्ध करवाने, कानूनी सलाह, वाद दायर करने और अन्य आवश्यक विधिक सेवाएं निःशुल्क प्रदान की जाती हैं। उन्होंने साइबर अपराधों से बचाव के उपायों की जानकारी देते हुए लोगों से ऑनलाइन ठगी की स्थिति में तुरंत पुलिस या संबंधित विभाग को सूचित करने की अपील की।
उन्होंने बाल विवाह निषेध कानून, सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए उपलब्ध कानूनी सहायता, संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों एवं कर्तव्यों और बेहतर समाज के निर्माण में नागरिकों की भूमिका पर भी विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण समय-समय पर ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को कानूनों और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध करवाता है। उन्होंने आमजन से अपील की कि किसी भी कानूनी समस्या या सहायता की आवश्यकता होने पर प्राधिकरण से संपर्क कर सेवाओं का लाभ उठाएं।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न कानूनी विषयों पर जानकारी साझा की गई और प्रतिभागियों के सवालों का समाधान किया गया। पंचायत प्रतिनिधियों, महिला मंडलों और युवक मंडलों के सदस्यों ने ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।



