पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मौजूदा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू की सरकार ने व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर उन लोगों को पुरस्कार दिए हैं, जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।
ठाकुर ने विशेष रूप से ऊर्जा निगम के महाप्रबंधक स्व. विमल नेगी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु का मामला उठाते हुए कहा कि जिन अधिकारियों पर इस मामले में आरोप लगे, उन्हें सरकार ने न केवल बचाया बल्कि उन्हें फिर से महत्त्वपूर्ण पदों पर तैनात भी कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री ने स्व. नेगी की पत्नी को न्याय दिलाने का जो वादा किया था, अब वे उनसे नज़रे कैसे मिला पाएंगे?
विपक्ष के नेता ने कहा कि जो लोग भ्रष्टाचार को उजागर करने की कोशिश करते हैं या सरकार की लाइन से हटकर काम करते हैं, उन्हें सज़ा दी जा रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों तक को सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने की कीमत चुकानी पड़ी। बिजली बोर्ड और ऊर्जा विभाग में अनियमितताओं को सामने लाने वाले कर्मचारियों और इंजीनियरों को भी प्रताड़ित किया गया।
जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि जब किसी ने आंतरिक रूप से वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा किया, तो उस पर जांच क्यों नहीं हुई? उन्होंने कहा कि इस रवैये से सरकार की नीयत पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।
ठाकुर ने आरोप लगाया कि यह सरकार भ्रष्टाचार के आरोपियों को सज़ा देने की बजाय उन्हें अहम जिम्मेदारियाँ सौंप रही है, और यह प्रदेश के लोकतांत्रिक मूल्यों व सुशासन की भावना के खिलाफ है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और ‘व्हिसल ब्लोअर्स’ को दंडित करने की प्रवृत्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए।



