March 14, 2026

माय लविंग फैमिली – रणजोध सिंह

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रणजोध सिंह – नालागढ़

उस दिन संध्याकाल के समय, मैं सपत्नीक अपने अभिन्न मित्र के घर गया हुआ था| मित्र एक सरकारी नौकरी में उच्च पद पर आसीन था, जबकि उसकी पत्नी एक सुघड़ गृहणी थी| उनका बेटा एक प्रतिष्ठित प्राइवेट स्कूल में कक्षा चार का विद्यार्थी था तथा छोटी बेटी भी उसी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रही थी| मित्र ने बड़े उत्साह पूर्वक अपने बेटे का परिचय करवाया और बड़े गर्व से उसकी उपलब्धियां की चर्चा की| मगर बेटी के बारे में इतना ही बोला कि वह यू.केजी में पढ़ती है| मित्र की पत्नी ने बताया कि उनकी बेटी को ड्राइंग का बहुत शौक है| मित्र ने हँसते हुए तुरंत टिप्णी की, “और यही हम सबकी परेशानी का सबसे बड़ा कारण है| हम इसे हर दूसरे-तीसरे दिन एक ड्राइंग नोट-बुक लाकर देते हैं मगर यह ड्राइंग कम करती है और आड़ी-तिरछी रेखाएं लगाकर उन्हें खराब अधिक करती है| इस बीच मैंने नोट किया कि वह प्यारी सी बच्ची अपने हाथों में ड्राइंग की कॉपी लिए हुए चुपचाप खड़ी थी| शायद मुझे अपनी ड्राइंग दिखाना चाहती थी| मगर पापा की बातें सुनकर मायूस हो गई थी|

मैंने तुरंत उसे पास बुला कर स्नेहपूर्वक आग्रह किया, “बिटिया मुझे अपनी ड्राइंग नहीं दिखाओगी?” उसने प्रसन्नतापूर्वक अपनी ड्राइंग- नोटबुक मेरे हाथों में दे दी| उसकी आंखों की चमक देखते ही बनती थी| मैंने उसकी ड्राइंग बुक को देखना आरंभ किया| पहले पेज़ पर झोपड़ी नुमा घर बनाया गया था, दूसरे पेज़ पर कुछ फलों को बनाने की चेष्टा की गई थी, और शेष समस्त पेज़ों पर आड़ी-तिरछी रेखाएं खिंची गईं थी| उसके मम्मी-पापा के चेहरे पर निराशा के भाव स्पष्ट झलक रहे थे, मगर बेटी की आंखों में पुरज़ोर उत्साह था| जिस कारण न चाहते हुए भी मैं उस नन्ही परी की ड्राइंग-बुक के पन्ने पलटता रहा|

एक चित्र को देखकर, जिसमे आड़ी-तिरछी रेखाओं के अलावा कुछ नहीं था, मैंने पूछ ही लिया, “बिटिया आपने यह क्या बनाया है?” अरे अंकल! आपने पहचाना नहीं, यह मेरे पापा हैं, दुनिया के सबसे ज्यादा स्ट्रांग आदमी, यही तो मेरा सबसे ज्यादा ख्याल रखते हैं|” उसने सीधी खींची हुई सबसे बड़ी रेखा पर हाथ रखकर कहा| फिर उसने एक छोटी सी रेखा पर हाथ रख कर तनिक मुहँ बना कर कहा, “यह भैया है, जो हर समय मुझसे लड़ता रहता है| देखो न ड्राइंग-बुक में भी मुझे चिड़ा रहा है| फिर अन्य दो रेखाओं को दिखाकर वह काफी भावुक हो गई| ये दोनोँ रेखाएं एक दूसरे से मिली हुई थी| उसने चहकते हुए कहा, “ये मेरी मम्मी है जो मुझे बहुत प्यार करती है मम्मी ने जिस लड़की की उंगली पकड़ रखी है, वह मैं हूँ|” अंकल कैसी है मेरी ड्राइंग? मैंने इस पेंटिंग का नाम रखा है, ‘माय लविंग फैमिली|”

यह बताते हुए उसे लड़की के चेहरे पर खुशी की हज़ारों कलियाँ चटक रही थीं| मगर उसके मम्मी-पापा की आंखों नम हो गई थी| मेरे मुँह से केवल इतना ही निकला,“शाबाश बिटिया तुम्हारी ड्राइंग बहुत अच्छी है|”

मेरा भारत महान – रणजोध सिंह

Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

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