राजीव गांधी ग्रीन एडॉप्शन योजना के तहत दो संस्थानों से समझौता

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हिमाचल प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी राजीव गांधी ग्रीन एडॉप्शन योजना के तहत वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कुल्लू में दो निजी संस्थानों रेड एप्पल और पैराडाइज शैटो के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस पहल का उद्देश्य वनीकरण, क्षतिग्रस्त वन क्षेत्रों के पुनर्स्थापन और पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी को बढ़ावा देना है।

एमओयू हस्ताक्षर कार्यक्रम में प्रधान मुख्य अरण्यपाल (HoFF) एवं मुख्य परियोजना निदेशक, जाईका वानिकी परियोजना डॉ. संजय सूद तथा वन संरक्षक, कुल्लू वृत्त संदीप शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ. संजय सूद ने कहा कि योजना के तहत कॉर्पोरेट संस्थान, शैक्षणिक संस्थाएं, संगठन और अन्य पात्र इकाइयां वन विभाग द्वारा चिन्हित क्षेत्रों को गोद लेकर वहां पौधारोपण, पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन और रखरखाव संबंधी कार्य कर सकेंगी। सभी गतिविधियां विभाग की तकनीकी गाइडलाइन और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप संचालित की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि यह योजना जैव विविधता संरक्षण, जल और मृदा संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने तथा स्थानीय समुदायों के लिए सतत आजीविका के अवसर सृजित करने में सहायक सिद्ध होगी। साथ ही यह कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत पर्यावरणीय निवेश को भी प्रोत्साहित करेगी।

डॉ. सूद ने स्पष्ट किया कि गोद लिए गए वन क्षेत्रों का स्वामित्व और प्रबंधन राज्य सरकार के पास ही रहेगा तथा सभी कार्य वन विभाग की निगरानी में किए जाएंगे, जिससे परियोजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ग्रीन एडॉप्शन योजना हिमाचल प्रदेश को अधिक हरित और पर्यावरणीय रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो जनसहभागिता और संस्थागत सहयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देगी।

दो दिवसीय कुल्लू दौरे के दौरान डॉ. संजय सूद ने विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर जाईका वानिकी परियोजना सहित विभिन्न गतिविधियों की प्रगति का आकलन किया। उन्होंने बाबेली नेचर पार्क का भी दौरा किया और वहां पर्यावरणीय स्वच्छता तथा पारिस्थितिक मानकों को बनाए रखने पर बल दिया। इस दौरान उन्होंने पौधारोपण अभियान के तहत चिनार का पौधा भी लगाया।

डॉ. सूद ने कॉर्पोरेट संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं और औद्योगिक प्रतिष्ठानों से अपील की कि वे राजीव गांधी ग्रीन एडॉप्शन योजना से जुड़कर हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही स्वच्छ, हरित और सतत भविष्य का निर्माण संभव है।

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